भास्कर न्यूज| रायगड़ा कोरापुट जिले के लक्ष्मीपुर ब्लॉक अंतर्गत ओडीया पेंट पंचायत के बिरिगुड़ा कॉलोनी के सैकड़ों आदिवासी ग्रामीणों ने मंगलवार को हुंकार भरी। अपने घर और जमीन के पक्के पट्टे की मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने लक्ष्मीपुर तहसील कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीणों का आरोप है कि हिंडाल्को कंपनी, आईडीसीओ और स्थानीय राजस्व प्रशासन की मिलीभगत के कारण वे पिछले 50 वर्षों से अपनी ही जमीन पर ”परदेसी” बने हुए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1975 में तत्कालीन आदिवासी विकास एवं शिक्षा मंत्री रामचंद्र उत्काका ने 45 परिवारों को 4 सेंट घर का पट्टा और 2 एकड़ कृषि भूमि आवंटित की थी। 50 साल पहले शुरू हुई इस कॉलोनी में आज परिवारों की संख्या 300 के पार पहुंच गई है, लेकिन प्रशासन ने एक भी नए परिवार को पट्टा जारी नहीं किया। ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि वर्ष 2014 तक प्रशासन ने उनसे नियमित टैक्स और किराया वसूला, फिर भी उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया गया। पट्टा न होने के कारण ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पक्के कागज न होने की वजह से उन्हें प्रधानमंत्री आवास, बिजली कनेक्शन, सड़क और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हाथों में तख्तियां लिए सैकड़ों ग्रामीणों ने हमें जमीन दो, हिंडाल्को जवाब दो और पट्टा हमारा अधिकार है के नारे लगाए। इस विरोध प्रदर्शन को क्षेत्रीय विधायक पवित्र सौंता का भी समर्थन मिला। विधायक ने मौके पर तहसीलदार और रेवेन्यू इंस्पेक्टर से बात की और आईडीसीओ सहित जिला कलेक्टर से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने कहा। ग्रामीणों का कहना है कि जब कंपनी ने जमीन का उपयोग किया और प्रशासन ने हमसे टैक्स वसूला, तो हमें कानूनी पट्टा देने में देरी क्यों? यह आदिवासियों के साथ सीधा धोखा है। ग्रामीण बोले- लिखित आदेश न दिया तो उग्र आंदोलन होगा तहसीलदार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही गांव में सर्वे कराया जाएगा और रिकॉर्ड सुधार कर पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि लिखित आदेश और समय-सीमा तय नहीं की गई, तो यह आंदोलन जिला और राज्य स्तर तक उग्र रूप लेगा।


