शहडोल में नौकरी और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों, किसानों और ट्रांसपोर्टरों ने SECL सोहागपुर के रामपुर-बटुरा ओपन कास्ट मेगा प्रोजेक्ट में कोयला उत्पादन और डिस्पैच कार्य पूरी तरह बंद करा दिया है। इस आंदोलन के कारण खदान का संचालन ठप हो गया है, जिससे SECL को प्रतिदिन लगभग एक करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। रोजगार और पुनर्वास के वादे पूरे न करने का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि खदान विस्तार के दौरान कालरी प्रबंधन ने रोजगार और पुनर्वास के जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं किए गए हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन ली गई, लेकिन परिवार के सदस्यों को न तो नौकरी मिली और न ही उचित पुनर्वास की व्यवस्था की गई। ट्रांसपोर्टरों ने भी स्थानीय लोगों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आंदोलन का समर्थन किया है। अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारी स्थिति को देखते हुए ग्रामीण, किसान और ट्रांसपोर्टर खदान के मुख्य गेट के पास टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। आंदोलन के कारण कोयला उत्पादन से लेकर डिस्पैच तक का पूरा काम प्रभावित है। इस दौरान जब खदान संचालन शुरू कराने का प्रयास किया गया, तो प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों व SECL सुरक्षा अधिकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौके पर पुलिस बल तैनात यह मामला अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर-बटुरा मेगा प्रोजेक्ट का है। पुलिस मौके पर तैनात है और हालात पर नजर बनाए हुए है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक नौकरी और पुनर्वास को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। कालरी प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


