राम ने 31 तीर चलाकर रावण के दसों शीश काटे:रामलीला में 51 फीट रावण के पुतले का दहन; आंख-मुंह से निकले अग्नि फव्वारे

विदिशा की ऐतिहासिक श्रीरामलीला के अंतिम चरण में शुक्रवार को राम-रावण युद्ध और रावण वध का भव्य मंचन किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा लंकाधिपति रावण के वध के बाद 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान रामलीला मेला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। रामलीला के अंतिम दिन राम और रावण की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध का मंचन हुआ। एक ओर काले वस्त्रों में रावण की मायावी सेना थी, तो दूसरी ओर लाल वस्त्रों में वानर सेना और लक्ष्मण के साथ श्रीराम युद्धभूमि में डटे रहे। संवाद और युद्ध दृश्य घंटों तक चले। विभीषण के संकेत पर हुआ रावण वध
मंचन के दौरान विभीषण के संकेत पर श्रीराम ने एक साथ 31 तीर चलाए, जिससे रावण के दसों शीश कट गए। अंत में नाभिकुंड पर किए गए प्रहार से रावण का वध दर्शाया गया। विशेष तकनीक से बना 51 फीट ऊंचा रावण
मैदान में स्थापित 51 फीट ऊंचा रावण का पुतला विशेष तकनीक से तैयार किया गया था। दहन के समय रावण की नाभि में घूमता इलेक्ट्रॉनिक चक्र, आंखों और मुख से निकलते अग्नि फव्वारे दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। आतिशबाजी और इलेक्ट्रॉनिक फायर शो ने बांधा समां
रावण दहन के बाद करीब दो घंटे तक रंग-बिरंगी आतिशबाजी का प्रदर्शन हुआ। इलेक्ट्रॉनिक फायर शो के दौरान मेला परिसर दूधिया और सतरंगी रोशनी से जगमगा उठा। भोपाल और राघोगढ़ से आए कलाकारों के बीच करीब दो घंटे तक इलेक्ट्रॉनिक फायर शो का मुकाबला चला। 300 से अधिक कलाकार, 500 वालंटियर तैनात
इस वर्ष रामलीला मंचन में 300 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया, जबकि 500 से ज्यादा वालंटियर व्यवस्थाओं में जुटे रहे। श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान सहित प्रमुख पात्रों को मथुरा-वृंदावन से मंगाए गए नए आभूषण पहनाए गए थे। हजारों दर्शक पहुंचे, मैदान हुआ खचाखच
रामलीला की भव्यता को देखने विदिशा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों दर्शक मेला मैदान पहुंचे। स्थिति यह रही कि मैदान में तिल धरने की जगह नहीं बची। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 250 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मेला परिसर में बैरिकेडिंग की गई और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी गई। यह खबर भी पढ़ें
125 साल पुरानी रामलीला, विश्वयुद्ध-कोरोना में भी नहीं रुकी एक ऐसी रामलीला जिसे न हिटलर का विश्वयुद्ध रोक पाया, न कोरोना का लॉकडाउन। यह अंग्रेजों की गोलियों से भी नहीं डरी। मशालों से शुरू हुई और अब स्मार्टफोन की फ्लैश लाइट तक पहुंच गई है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के विदिशा के मेला ग्राउंड में 125 साल पहले शुरू हुई ‘चलित रामलीला’ की। पूरी खबर पढ़ें…

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