भास्कर न्यूज| रायगड़ा बुधवार को चैती महोत्सव के अंतिम संध्या में रायगड़ा जिलेवासियों के दिलों में एक अविस्मरणीय स्मृति छोड़कर चैती ने विदाई ली। चैती फिर से सजे-धजे रूप में अगले वर्ष लौटेगी। अंतिम संध्या में जिलापाल और संस्कृति परिषद अध्यक्ष अशुतोष कुलकर्णी की अध्यक्षता में इस वर्ष की चैती की अंतिम रजनी मनाई गई। अंतिम रजनी में रायगड़ा सेवा समाज के छात्रों ने बंदे उत्कल जननी गीत प्रस्तुत कर चैती की विदाई रजनी को सम्मान दिया। अतिरिक्त जिलापाल निहार रंजन काहंर ने स्वागत भाषण दिया। कोरापुट लोकसभा सांसद सप्तगिरि शंकर उल्का ने कहा कि रायगड़ा को देश का नंबर-1 जिला बनाने के लिए प्रयास जारी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 100% मोबाइल टावर लगाने और सभी विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशाला खोलने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चैती के लिए एक स्थायी स्थान चिन्हित कर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है, क्योंकि चैती आदिवासी कला को विश्व-पटल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस मौके पर विधायक आपलस्वामी काड्राका, विधायक सत्यजीत गमांग, विकास अधिकारी अक्षय कुमार खेमुंड, अतिरिक्त जिलापाल नवीन चंद्र नायक, एसपी स्वाति एस कुमार आदि मंचासीन थे। जिलापाल कुलकर्णी ने सभी अतिथियों को सम्मानित किया और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी अतिथियों ने सम्मान प्रदान किया। पांचवीं संध्या में जेडी ग्रुप, पद्मपुर देवता ग्रुप, चंदन ग्रुप और बारिझुल के आदिवासी सांस्कृतिक क्लब ने संबलपुरी नृत्य, देवीप्रसाद ग्रुप का डांडिया, उषा भारती ग्रुप का झुमुर, रायगड़ा महिला महाविद्यालय का असमिया बिहू, सुनील ग्रुप का साइलोडी, रायगड़ा एनसीसी छात्रों का पंजाबी भांगड़ा, घुंघरू कला विकास ग्रुप का माहुरी, गीत परिवार का नवदुर्गा और बलांगीर टिटिलागढ़ का रासरकेली नृत्य, सभी ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।


