रायपुर में आदिवासी बच्चों को सरकारी स्कीम में पढ़ाने के बहाने उनका शोषण हुआ है। ये शोषण पति-पत्नी ने मिलकर किया है। उन्होंने कांकेर के बच्चों को एक सामाजिक संस्था के माध्यम से घर लेकर आ गए। फिर बच्चों से घर बर्तन मंजवाया, पैर दबवाया और घर के झाड़ू पोछे लगवाएं। इसके अलावा उन्होंने बच्चों को अपने पेरेंट्स से भी बात करने के लिए मना कर दिया। बच्चों ने जब अपने परिजनों को आपबीती सुनाई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। यह पूरा मामला साल 2014-15 का है। रायपुर के कबीर नगर थाना क्षेत्र के कबीर नगर फेज 4 में सतीश शर्मा उर्फ क्षितिज और उनकी पत्नी बिनीता शर्मा के साथ रहते था। उन्होंने बस्तर मित्र फाउंडेशन के नाम से झूठी जानकारी देकर मंत्रालय से संस्था का रजिस्ट्रेशन करवा लिया। फिर शिक्षा विभाग से अप्रूवल लेकर आदिम जाति और अनुसूचित जाति के स्टूडेंट के प्रोग्रेस के लिए काम करने की बात कही। कांकेर से 3 बच्चों को अपने घर पर रखा आरोपी पति-पत्नी ने सरकार के उत्कर्ष विद्यार्थी योजना/ जवाहर उत्कर्ष योजना के अंतर्गत लाभ लेकर कांकेर के 3 आदिवासी बच्चों को अपने घर लेकर आ गए। फिर आरोपी बच्चों से घर में झाड़ू पोछा बर्तन धोना, हाथ पैर दबाना और पूरे समय घर का काम करवाते थे। जब बच्चों के परिजनों का फोन आता तो वह फोन आने की जानकारी भी उन्हें नहीं देते थे। इस बात से परिजन लगातार परेशान हो गए। लंबे समय बाद जब परिजनों ने बच्चों से बातचीत की तो बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाई। इसके बाद पूरे मामले की शिकायत हुई। पुलिस ने इस मामले में आरोपी सतीश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। जबकि उनकी पत्नी बिनीता शर्मा फरार हो गई। पति को मिली है आजीवन कैद की सजा इस मामले में न्यायालय ने साल 2022 में आरोपी सतीश शर्मा को आजीवन कैद की सजा सुनाई है। पुलिस ने अनुसूचित जाति जनजाति एक्ट, किशोर न्याय और बालकों का संरक्षण एक्ट और 420 जैसी धाराएं आरोपियों पर लगी। इस मामले में पुलिस ने 10 साल बाद फरार महिला बिनीता शर्मा को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है।


