रायसर प्लाजा में अव्यवस्थाओं से व्यापारी परेशान:मेंटेनेंस सोसायटी पर लिफ्ट, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी के आरोप

इंदिरा बाजार स्थित रायसर प्लाज़ा एक बार फिर विवादों में है। प्लाज़ा के व्यापारियों ने मेंटेनेंस सोसायटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए वित्तीय गबन और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगाए हैं। व्यापारियों ने प्रदेश के सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग से हस्तक्षेप की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि प्लाजा में पार्किंग सहित कई निर्माण कार्य कराए गए, लेकिन न तो टेंडर प्रक्रिया सामने रखी गई और न ही लागत व ठेका प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे सोसायटी के कामकाज को लेकर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोसायटी की कार्यकारिणी पर सवाल
व्यापारी बुद्धिप्रकाश अमेरिया ने बताया कि यह बाजार ‘रायसर प्लाज़ा मेंटेनेंस सोसायटी’ के नाम से रजिस्टर्ड है। यहां करीब 600 दुकानें हैं। जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप और जूतों से जुड़ा व्यापार होता है।यहां बड़ी संख्या में रिटेलर और होलसेल कारोबारी यहां से जुड़े हुए हैं। बुद्धिप्रकाश ने बताया- जब बिल्डर्स से दुकानें खरीदी गई थीं, उसी समय सभी दुकानदारों से एक हजार रुपए शुल्क लेकर उन्हें मेंबर बनाया गया था। नियमों के अनुसार कार्यकारिणी को साधारण सभा के जरिए बजट पास कराना चाहिए था, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।
चुनाव नहीं, समस्याओं की सुनवाई भी नहीं
व्यापारी दीपक सांवरिया ने बताया कि वे साल 2014 से यहां सीसीटीवी का व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति के कार्यालय में कोई सुनने वाला नहीं है। समय पर चुनाव नहीं होते और साधारण सभा की बैठक भी नहीं बुलाई जाती। बजट सभी की सहमति से पास होना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा कभी नहीं होता।
उन्होंने बताया कि प्लाजा में चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। टॉयलेट और बाथरूम की सफाई नहीं होती। अध्यक्ष व्यापारियों की समस्याओं पर न ध्यान देते हैं और न ही समाधान की कोशिश की जाती है। इसका असर सीधे व्यापार पर पड़ रहा है और रिटेलर की हालत खराब होती जा रही है।
लिफ्ट, पार्किंग और सुरक्षा की बदहाली
व्यापारियों का कहना है कि तीसरी और चौथी मंजिल पर जिनकी दुकानें हैं, उन्हें आने-जाने में भारी परेशानी होती है। बिल्डिंग में चार लिफ्ट हैं, लेकिन एक लिफ्ट को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। बाकी तीन लिफ्ट कभी चलती हैं, कभी बंद रहती हैं।
लोडिंग-अनलोडिंग के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। आसपास बेतरतीब तरीके से गाड़ियां खड़ी रहती हैं, जिससे माल लाने-ले जाने में दिक्कत होती है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं और पार्किंग की कोई प्रॉपर व्यवस्था नहीं है। व्यापारियों का आरोप है कि कई बार कस्टमर की गाड़ियां भी यहां से गायब हो चुकी हैं।

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