रायसेन जिला अस्पताल रायसेन में रविवार को इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए नगर पालिका के सेवानिवृत्त सफाई दरोगा चुन्नीलाल तिवारी की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर परिजनों ने सिविल सर्जन को लिखित शिकायत भी दी है, जिसमें अस्पताल के वेंटिलेटर बंद होने की बात कही गई है। परिजनों के अनुसार, रविवार सुबह चुन्नीलाल तिवारी बाइक से गिरकर घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां समय पर इलाज नहीं मिल सका। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में जरूरत के समय वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई और उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप
मृतक के परिजन राजू कांकर ने बताया कि जब वे उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तो सीटी स्कैन कर्मचारियों ने 11 बजे आने को कहा। इसके अलावा, उस समय अस्पताल में कोई वरिष्ठ डॉक्टर भी मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल के सभी वेंटिलेटर बंद पड़े थे। मामले की जानकारी मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. यशपाल बाल्यान अस्पताल पहुंचे और वेंटिलेटरों की स्थिति की जांच की। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में कुल 21 वेंटिलेटर हैं, जिनमें से 11 चालू हालत में हैं, जबकि 10 वेंटिलेटर बंद हैं। 10 वेंटिलेटर बंद
सिविल सर्जन के अनुसार, जो 10 वेंटिलेटर बंद हैं, वे कोविड आईसीयू में रखे हुए हैं। कोविड आईसीयू बंद होने के कारण उनमें तकनीकी खराबी आ गई है। उन्होंने बताया कि संबंधित कंपनी को वेंटिलेटर ठीक करने के लिए सूचना दे दी गई है।
वहीं, जिला अस्पताल के डॉक्टर आकाश चतुर्वेदी ने चुन्नीलाल तिवारी का प्राथमिक परीक्षण किया था। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें बताया था कि सभी वेंटिलेटर खराब हैं, जबकि सिविल सर्जन का कहना है कि अस्पताल में कुछ वेंटिलेटर चालू हैं। इस मामले को लेकर अब अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।


