राशन कालाबाजारी के 5 दोषियों को 4-4 साल की जेल:नीमच कोर्ट ने सुनाया फैसला, कहा-गरीबों का हक छीनने वाले सहानुभूति के पात्र नहीं

नीमच कोर्ट ने राशन की कालाबाजारी के एक मामले में पांच दोषियों को चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार शर्मा ने यह फैसला सुनाया। दोषियों ने सरकारी गेहूं, शक्कर और नमक की हेराफेरी की थी। राशन कालाबाजारी के मामले पर कोर्ट का फैसला यह मामला वेयर हाउस से निकली लगभग 190 क्विंटल गेहूं और अन्य सामग्री से संबंधित है। यह सामग्री उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंचने से पहले ही गायब कर दी गई थी। इस अपराध में ट्रक मालिक, ड्राइवर और कमीशन एजेंटों की मिलीभगत सामने आई थी। मामले का खुलासा 31 जनवरी 2022 को हुआ। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जितेंद्र नागर को सूचना मिली थी कि ग्राम मांगरोल और बोरदियाकलां की राशन दुकानों पर अनाज नहीं पहुंचा है। वेयर हाउस में स्टोर किया जा रहा राशन विभागीय जांच में पता चला कि 25 जनवरी 2022 को देवास की विनायक रोड लाइन्स के ट्रक (MP 09 HG 0305) में वेयर हाउस से 190 क्विंटल 86 किलो गेहूं, 11 किलो शक्कर और 706 किलो नमक भरकर भेजा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि यह ट्रक अपनी निर्धारित मंजिल तक नहीं पहुंचा। आरोपियों ने रास्ते में ही इस सरकारी राशन को खुले बाजार में बेच दिया और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की कोशिश की। 5 आरोपियों को 4 साल के जेल की सजा न्यायालय ने जसवंत सिंह चौहान (जमुनियारावजी), सद्दाम मेव (मल्हारगढ़), आसिफ अहमद हुसैन (मल्हारगढ़), लोकेश उर्फ सोनू तिवारी (नीमच सिटी) और मेहरबान सिंह (देवास) को दोषी ठहराया। उन्हें आईपीसी की धारा 407/120बी और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई गई है। सुनवाई के दौरान, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी विवेक सोमानी ने तर्क दिया कि यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि समाज के सबसे गरीब वर्ग के खिलाफ किया गया अपराध है। न्यायालय ने इन तर्कों से सहमति जताते हुए टिप्पणी की कि पात्र गरीबों का हक छीनने वाले किसी भी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *