आर्य समाज के प्रणेता स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती का 98वां बलिदान दिवस श्रद्धा और आस्था के साथ धर्म रक्षा दिवस के रूप में मनाया गया। प्रात:कालीन सभा में वक्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के शुद्धि आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और गुरुकुल शिक्षा पद्धति की स्थापना पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने उनकी बलिदान गाथा को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि आर्य समाज राष्ट्रभक्ति और भारतीय संस्कृति का मजबूत स्तंभ है। कोलकाता से आए आचार्य योगेश शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज हिंदू समाज का सुरक्षा कवच है। इसे मजबूत करना ही देश को सशक्त बनाएगा। स्थानीय श्रद्धानंद रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में सोमवार को आयोजित बलिदान दिवस पर उन्होंने कहा कि भले ही आज इतिहास उन्हें उतना महत्व नहीं दे रहा हो, पर एक दिन ऐसा जरुर आएगा, जब भारत और संसार के लोग उन्हें अपना गुरु मानेंगे। आज अमेरिका में वेद मंत्र गूंज रहे हैं। यह महर्षि दयानंद द्वारा देखे गए सपने की ही जीत है। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान और उनके जीवन से प्रेरणा लेने पर जोर दिया गया। दानापुर पटना से आए भजनोपदेशक सत्य प्रकाश आर्य ने भजनों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर ऋृषि लंगर का भी आयोजन किया गया। इससे पहले सुबह आर्य समाज मंदिर में हवन हुआ और जागरूकता शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में डीएवी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षकों और प्राचार्यों समेत 700 से अधिक प्रतिभागियों ने जागरूकता शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा का उद्देश्य स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के साथ आर्य समाज के सिद्धांतों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में आर्य समाज रांची की संरक्षक सुशीला गुप्ता, एसएल गुप्ता, प्रेम प्रकाश आर्य, प्रधान राजेंद्र कुमार आर्य, मंत्री अजय आर्य, संजय पोद्दार, अशोक पाठक, सुशील आर्य, उषा आर्या, काजल आर्या, संगीता आर्या, उर्मिला और वीणा भी शामिल हुए।


