राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस आज:डिजिटल फ्रॉड हो या भ्रामक विज्ञापन… उपभोक्ता शिकायत करें तो मिलेगा न्याय

जागो ग्राहक जागो का स्लोगन के बावजूद उपभोक्ता कभी ऑनलाइन तो कभी ऑफलाइन ठगी के शिकार हो रहे हैं। स्थिति यह है कि उपभोक्ता भ्रामक विज्ञापन से ही नहीं बल्कि एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा चोरी के जरिए भी धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। इसको लेकर दैनिक भास्कर ने मप्र राज्य उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग के प्रभारी अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय से उपभोक्ता संरक्षण व उनके अधिकारों को लेकर बातचीत की। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक तो होना पड़ेगा। शिकायत करनी होगी तभी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। स्वत: संज्ञान का प्रावधान नहीं है… बिना शिकायत के आयोग कुछ नहीं कर सकता
ई-कॉमर्स पर ठगी और नकली या घटिया उत्पादों से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं। इससे निपटने के लिए का कदम उठाए हैं?
ऑनलाइन शॉपिग में नकली व घटिया उत्पाद की शिकायत उपभोक्ता को उचित फोरम में करना होगी। बिना शिकायत के आयोग कुछ नहीं कर सकता। यह एक ज्यूडिशियरी प्लेटफाॅर्म है, इसमें स्वत: संज्ञान का प्रावधान नहीं है। आयोग में लंबित मामलों की संख्या अधिक क्यों है?
सर्किट बेंच के अलावा मीडिएशन सेल के माध्यम से भी प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है। अब तो उपभोक्ता लोक अदालत का भी प्रावधान किया है जिससे प्रकरणों के जल्दी निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल ट्रांजेक्शन संबंधी शिकायतों में कैसे राहत दे रहे हैं?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण काम कर रहा है। प्राधिकारण ने उपभोक्ताओं के हित में और उनके साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक विज्ञापनों पर क्या सख्ती की जा रही है?
कई प्रकरणों पर सुनवाई हुई है। कई मामलों में प्राधिकरण ने पेनल्टी भी लगाई है। हेल्थकेयर उत्पाद और सेवाओं की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए क्या रणनीति है?
यदि कोई उपभोक्ता उत्पाद से संबंधित कोई शिकायत करता है तो आयोग उस पर सुनवाई जरूर करेगा। यदि उत्पाद में कोई दोष है, तो क्या उपभोक्ता को रिटर्न, एक्सचेंज या सुधार की सुविधा मिल रही है?
उपभोक्ता जागरूक होंगे तो कंपनियों को अपनी पॉलिसी में स्पष्टता रखनी ही पड़ेगी। यदि सेवा प्रदाता गुणवत्तापूर्ण सेवा नहीं दे पा रहा है, तो उपभोक्ता को क्या सहायता मिलती है?
कई मामलों मेें जिला उपभोक्ता आयेाग और राज्य उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ताओं को परिवाद व्यय, हर्जाना और जुर्माना लगाकर उपभोक्ता की सहायता की है। एआई, डिजिटल प्लेटफॉर्म आदि बदलावों को देखते हुए क्या संरक्षण कानून में कुछ बदलाव पर विचार हो रहा है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में बहुत ही विस्तार से उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर विचार करके कानूनी प्रावधान किया गया है। चाहे एआई हो या डि​जिटल प्लेटफार्म के माध्यम से की गई ठगी या धोखाधड़ी। सबके लिए प्रावधान है।

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