कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र के 81वें जन्मदिवस के अवसर पर उनकी कला यात्रा को समर्पित राष्ट्रीय समसामयिक लघु चित्रण कार्यशाला के 5वें संस्करण के विजेताओं की घोषणा की गई। यह कार्यशाला राजस्थान ललित कला अकादमी और कलावृत्त संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यशाला में बने श्रेष्ठ चित्रों के लिए गठित तीन सदस्यीय चयन समिति ने पांच उत्कृष्ट चित्रकारों का चयन किया। इस बार चयन समिति में जयंत पारिख, नियति शिंदे और अर्पणा कौर शामिल थे। सम्मानित चित्रकार और उनके पुरस्कार इसके अलावा चेयरमैन चॉइस के तहत इस वर्ष नया सम्मान कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र सम्मान शुरू किया गया, जिसे डॉ. हेमलता लौहार के चित्र के लिए प्रदान किया गया। पारंपरिक लघु चित्रण को बचाने का प्रयास
कलावृत्त संस्था के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने कहा कि यह कार्यशाला पारंपरिक लघु चित्रण शैलियों को पुनर्जीवित करने और आधुनिक तकनीकों के साथ उनके समन्वय पर केंद्रित है। इस बार भी कलाकारों ने अपने बेहतरीन चित्रों के जरिए कला की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया है। संदीप सुमहेन्द्र ने अपने पिताश्री डॉ. सुमहेन्द्र के विचारों को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक लघु चित्रण के संरक्षण और नवाचार के लिए अपने समर्पण को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला कलाकारों के लिए न केवल तकनीकी कौशल को सुधारने का अवसर है, बल्कि लुप्त होती कला शैलियों को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जीवंत करने का प्रयास भी है। यह कार्यशाला हर वर्ष 2 से 12 नवंबर तक आयोजित की जाती है, जिसमें देशभर से कलाकार भाग लेते हैं। इस वर्ष पंजाबी विश्वविद्यालय के कला संकाय के 17 चित्रकारों ने भी भाग लिया। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए संदीप सुमहेन्द्र ने कलानेरी आर्ट गैलरी के विजय शर्मा और सौम्या शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी सहयोग की आशा जताई। गौरतलब है कि 1975 में स्थापित कलावृत्त संस्था ने कला के उत्थान और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए हमेशा प्रयासरत रही है। डॉ. सुमहेन्द्र द्वारा शुरू की गई लघु चित्रण विधा आज भी कला संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


