कनाडा में अफीम निर्यात करने के प्रयास से जुड़े मादक पदार्थ तस्करी मामले में पूर्व हेड मुंशी समेत दो दोषियों को 3-3 साल की सजा सुनाई है। एडिशनल सेशन जज मनीला चुघ की अदालत ने दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माने भी लगाया है। चंडीगढ़ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के खुफिया अधिकारी करमवीर सिंह के माध्यम से दी गई शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया था। एनसीबी को 15 अप्रैल, 2024 को ढंडारी खुर्द के जीटी रोड पर डीएचएल सुविधा में एक संदिग्ध पार्सल की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली। पार्सल को कनाडा में एक पंजाबी को भेजा जाना था। एनसीबी की टीम ने खेप की जांच करने के लिए कूरियर कंपनी के कार्यालय पर छापा मारा। हॉकी स्टिक के दो कवर बरामद किए गए। जब एक कवर को खोला गया, तो उसमें से एक हॉकी स्टिक मिली, जिस पर काली टोपी लगी हुई थी। अधिकारियों ने टोपी हटाई और देखा कि हॉकी स्टिक खोखली थी। इसके अंदर काले-भूरे रंग की अफीम कसकर भरी हुई थी। हॉकी स्टिक में 15 पैकेट बरामद हुए हॉकी स्टिक को काटा गया, जिससे 15 स्टिक के आकार के पैकेट बरामद हुए थे जो काले टेप में लिपटे हुए थे, जिनमें अफीम थी। जांच में पार्सल की बुकिंग की जानकारी में नसीब सिंह का आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस शामिल था जो शिपमेंट से जुड़ी हुई थी। निर्यात शिपमेंट के लिए प्राधिकरण पर उसके हस्ताक्षर थे, जिससे उसकी संलिप्तता की पुष्टि हुई। जांच में रायकोट पुलिस स्टेशन के पूर्व हेड मुंशी गोबिंद सिंह का नाम तस्करी नेटवर्क में सामने आया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी एक संगठित ड्रग तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा थे, जो खेल उपकरणों की आड़ में कनाडा को नशीले पदार्थों का निर्यात करने का प्रयास करता था। अदालत ने ट्रायल के दौरान अमृतपाल सिंह गांव रत्तोवाल लुधियाना और गुरचरण सिंह गांव नांगल खुर्द, पखोवाल को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने गांव नंगल खुर्द निवासी गोबिंद सिंह और नसीब सिंह को तीन-तीन वर्ष के सजा और 30-30 हजार रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई।


