सोशल मीडिया पर की गई एक आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर जिले का माहौल बीते दो दिनों से गरमाया हुआ है। ब्राह्मण समाज से जुड़ी शिकायतों के बाद सिविल लाइन पुलिस ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर मनीष पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पोस्ट को समाज की बेटियों के अपमान से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे नाराजगी और आक्रोश बढ़ गया। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद बताया गया है कि मनीष पटेल ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट को लेकर ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश फैल गया। समाज के लोगों का आरोप है कि पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द समाज की बेटियों को अपमानित करने वाले थे। विवाद बढ़ने के बाद सिविल लाइन थाना समेत जिले के अन्य थानों में भी शिकायतें दर्ज कराई गईं। लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस से हस्तक्षेप की अपील की। पोस्ट में संशोधन, लेकिन माफी नहीं आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद मनीष पटेल ने अपनी पोस्ट में इस्तेमाल किए गए कुछ आपत्तिजनक शब्दों में बदलाव किया। हालांकि, उसने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, जिससे लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई। समाज के लोगों का कहना है कि पोस्ट के जरिए जानबूझकर ब्राह्मण समाज की बेटियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। इसी कारण पूरे जिले में विरोध और आक्रोश देखने को मिल रहा है। शिकायत के आधार पर दर्ज हुई एफआईआर सिविल लाइन पुलिस ने ईटौरा निवासी आशीष तिवारी की शिकायत पर मनीष पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 196(1)(ए) और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश की जा रही है। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है। पहले भी विवादों में रहा है यूट्यूबर यह पहला मौका नहीं है जब मनीष पटेल विवादों में घिरा हो। इससे पहले भी उसके सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। पूर्व में उसने सेना के जवानों को लेकर भी आपत्तिजनक कंटेंट साझा किया था। समाज के संगठनों ने किया प्रदर्शन विवाद के बाद ब्राह्मण समाज से जुड़े संगठनों ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए। संगठनों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। समाज के संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो जिले में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। धाराओं का प्रावधान भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(ए) के तहत धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर वैमनस्य फैलाना दंडनीय अपराध है। वहीं धारा 353(2) महिला की गरिमा भंग करने के प्रयास से जुड़ी है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर एक से पांच वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।


