लखनऊ के रहमान खेड़ा में बाघ की दहशत 26वें दिन भी कायम है। गुरुवार सुबह शिकार किए गए पड़वे के अवशेष खाने के बाद दोपहर करीब 3 बजे सहिलामऊ गांव के पास बाघ रेलवे ट्रैक पार करते दिखा। सूचना मिलते ही बाघ को देखने के लिए गांव के लोग रेलवे ट्रैक की ओर दौड़ पड़े। DFO डॉ. सितांशु पांडेय ने बताया कि सहिलामऊ गांव के लोगों से दोपहर करीब साढ़े 3 बजे टाइगर के रेलवे लाइन पार करते देखे जाने की सूचना मिली थी। टीम को भेजकर इलाके की कॉम्बिंग शुरू की गई है। पहले देखिए बाघ दिखने के बाद की तस्वीरें… गांव के पास खेत में मिले पग चिह्न
वन विभाग को रेलवे ट्रैक के पास हारून खान के खेत में बाघ के पग चिह्न मिले, जिससे यह पुष्टि हो गई कि बाघ कुछ समय पहले ही यहां से गुजरा है। सहिलामऊ गांव के रहने वाले गुड्डु कुमार ने सबसे पहले बाघ को रेलवे ट्रैक पार करते देखा। गुड्डु ने बताया कि मैं खेत की ओर गया था। करीब 50 मीटर की दूरी से बाघ को खेतों से ट्रैक पार कर दूसरी तरफ जंगल की ओर जाते हुए देखा। मैं घबराकर गांव वापस लौट आया। इसके बाद लोगों को सूचना दी। वन विभाग को छका रहा बाघ
पहले केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के चौथे ब्लॉक् में बाघ का मूवमेंट था। यहां नील गाय और पड़वा का शिकार किया। यहां वन विभाग की सक्रियता बढ़ने पर बाघ ने यह इलाका छोड़ दिया। इसके बाद संस्थान के पीछे मीठे नगर गांव जाने वाले मार्ग के आस-पास उसकी मूवमेंट रही। अब यह मूवमेंट सहिलामऊ की ओर हो गया है। विशेषज्ञ डॉक्टर पहुंचे रहमानखेड़ा
वन विभाग की पकड़ से टाइगर अभी दूर है। बाघ का पकड़ने के लिए पीलीभीत से विशेषज्ञ डॉक्टर दक्ष प्रजापति को रहमान खेड़ा बुलाया गया है। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि अभी तक बाघ के मूवमेंट का क्षेत्र तय नहीं हो पा रहा है। इधर, गुरुवार दोपहर वन विभाग की टीम नो गो जोन में गायब रही। यहां मचान पर कोई वन कर्मी निगरानी करते नहीं मिला। क्या हैं बाघ को पकड़ने के इंतजाम?
वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए 15 ट्रैप कैमरे, दो कैचिंग केज और 5 टीमें लगाई हैं। कॉम्बिंग के लिए लाठी-डंडे, सुतली और बुलेट बम का सहारा लिया जा रहा है। एक्सपर्ट तो बुलाए गए, लेकिन कुछ हासिल नहीं हो पाया है। अभी तक हाथियों का भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। बाघ की गतिविधियां तो रिकॉर्ड हो रही हैं, लेकिन उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। गांवों में दहशत का माहौल, जानवर भी डरे
काकोरी इलाके में गांव के लोगों का कहना है कि वन विभाग की टीम केवल औपचारिकता निभा रही है। जब तक बाघ, इंसान पर हमला नहीं करेगा, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। गांव के लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। लोग अपने खेतों तक डर की वजह से नहीं जा पाते। वहीं, मवेशियों को भी जंगल में चारे के लिए नहीं ले जाते। गांव के पशु भी डरे हैं और उन्हें खूंटे से बांधकर चारा दिया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि चारा खत्म हो जाएगा तब क्या होगा? विशेषज्ञों की कमी और हाथियों का न आना बड़ा सवाल
बाघ पकड़ने के लिए जरुरी ट्रैंकुलाइजेशन एक्सपर्ट्स और हाथियों का न होना, वन विभाग की तैयारी की पोल खोलता है। 25 दिन से चली आ रही इस लापरवाही ने गांव वालों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। ……………………………… यह खबर भी पढ़े लखनऊ में बाघ ने दोबारा लौटकर शिकार खाया:अब तक 4 जानवरों को मारा, 25 गांवों के लोग परेशान; वन विभाग की टीम बेबस लखनऊ के काकोरी इलाके में बाघ 25 दिनों से घूम रहा है। हर हफ्ते वह शिकार करके अपनी भूख मिटा रहा है। अब तक बाघ 2 नील गया, 1 जंगली सुअर और 1 भैंस के बच्चे का शिकार कर चुका है। टाइगर की दहशत इतनी है कि 20 गांवों के लोग घरों में कैद होने पर मजबूर हैं। यहां पढ़े पूरी खबर


