लखनऊ में 20 किलोमीटर रेंज में घूम रहा टाइगर:जहां किया पहला शिकार, उससे 2 किमी पर दूसरी नीलगाय मारी; थर्मल ड्रोन से तलाश

लखनऊ के काकोरी और महिलाबाद बार्डर पर बाघ की दहशत बनी हुई है। रहमानखेड़ा से 2 किमी दूर हलुवापुर गांव में बाघ ने दूसरा शिकार किया है। इससे पहले गुरुवार (12 दिसंबर) दोपहर तीन बजे के करीब रहमानखेड़ा में बाघ ने नीलगाय का शिकार किया था। वन अधिकारियों का मानना है कि टाइगर इस इलाके के आसपास ही मौजूद है। अब कैमरे में भी टाइगर कैद हो गया है। बाघ का मूवमेंट 20 किमी के दायरे में है। उसके पैरों के निशान देख अधिकारियों को कहना है कि बाघ लगातार बार्डर वाले एरिया में घूम रहा है। वहीं, रहमानखेड़ा से 5 किमी दूर गुरुदीनखेड़ा गांव में फुट प्रिंट मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने थर्मल ड्रोन से बाघ की लोकेशन सर्च की। इसमें बाघ दिखा। अब विभाग बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़े में पड़वा (भैंस के बच्चे) को रखने की तैयारी में है। लखीमपुर के जंगल से भाग कर आया
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ लखीमपुर के जंगल से काकोरी और मलिहाबाद की तरफ आया है। बाघ हमेशा अपने तय एरिया में रहता है। जंगल में वर्चस्व की लड़ाई में हार कर बाघ वहां से निकल जाते हैं। अपने एरिया की तलाश में बाघ गोमती नदी का किनारा पकड़कर इधर आ जाते हैं। हो सकता है कि ये बाघ भी गोमती नदी का किनारा पकड़कर आया हो। थर्मल ड्रोन से बाघ की तलाश
डीएफओ सितांशु पांडेय ने बताया कि शनिवार को बेल क्षेत्र में ट्रैपिंग पिंजरा लगाया गया था। इसके अलावा दोनों चिह्नित क्षेत्रों में पांच और कैमरे लगाए गए हैं। वन विभाग की तीन टीमें बाघ की तलाश में जुटी हैं। अब मंगलवार को गांव के जंगलों में थर्मल ड्रोन फिर से उड़ाकर बाघ की तलाश की जाएगी। सोमवार को टीम ने गुरुदीनखेड़ा गांव में थर्मल ड्रोन उड़ाकर बाघ की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की। फिर एक कैमरे में बाघ नजर आया। करीब 5 किमी की रेंज 15 मिनट तक टीम बाघ को तलाश किया गया। SDO बोले- देर रात शिकार को आ सकता है खाने
वन विभाग के SDO हरि लाल ने बताया, सोमवार को दिन में हलुवापुर गांव के रमेश मिश्रा के आम के बाग में बाघ ने नीलगाय पर हमला कर मार डाला है। देर रात शिकार हुई नीलगाय को बाघ खाने आ सकता है। इसलिए ग्रामीणों को अलर्ट किया गया है। सरसों के खेत में दिखे फुट प्रिंट
सोमवार सुबह गुरुदीनखेड़ा के कमल लोधी सुबह माइनर (छोटी नहर) की तरफ शौच के लिए गए थे। जहां कमल को खेतों में बड़े-बड़े पैरों के निशान दिखे। घबराए कमल ने गांव में सूचना दी। ग्रामीण दिवाकर लोधी ने बताया कि माइनर के पास फूलों व सरसों के खेत मे पग चिह्न दिखाई दिए हैं। बाघ के खेत से निकलने से सरसों भी गिरे दिखाई पड़े। फुट प्रिंट बाघ के होने की पुष्टि
ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग टीम गांव में पहुंची और पग चिह्नों की जांच की। टीम ने बाघ के पग चिन्ह होने की पुष्टि की। टीम ने ग्रामीणों को सतर्क करते हुए कहा कि अकेले खेत और जंगल की ओर नहीं जाएं। अंधेरे में घर से निकलने से भी बचें। गोहरा मउ व करझन गांव में भी मिले फुट प्रिंट
वन विभाग के अवध वन प्रभाग के एसडीओ हरि लाल ने बताया कि गोहरा मउ, करझन में भी ग्रामीणों की सूचना दी कि खेतों और बागों में फुट प्रिंट दिखा। जांच में टाइगर के पग चिह्न होने की पुष्टि की गई। ग्रामीणों को सतर्क किया गया है। नाइट विजन कैमरे लगाए गए
वन विभाग की टीम और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया मिलकर बाघ को ट्रैक कर रहे हैं। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन और नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाघ दिख चुका है और अब उसे पकड़ने की तैयारी की जा रही है। जंगल और इससे सटे गांवों में वन विभाग ने पर्च बांटे हैं। इसमें बाघ से बचाव की जानकारी दी गई है। यह भी निर्देश दिया गया है कि अकेले कोई भी जंगल की तरफ न जाए। पग मार्क मिल रहे, लोकेशन नहीं
सोमवार को भी वन विभाग की टीम ने जंगल में बाघ की लोकेशन के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। वहां लगाए गए कैमरों की भी लगातार निगरानी की जा रही है। बाघ को कैद करने के लिए पिंजर में बकरी भी बांधी गई लेकिन बाघ लगातार वन विभाग की टीम को धोखा दे रहा है। गांवों में बाघ के पग मार्क तो मिल रहे हैं, लेकिन लोकेशन नहीं मिल रही है। नाकाबंदी कर इंट्री बैन कर दी गई
काकोरी के रहमानखेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के फार्म की पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी गई है। वहां केवल वन विभाग और पुलिस के अफसरों को ही एंट्री दी जा रही है। इसके अलावा स्थानीय कर्मचारी, मजदूर और वहां आने वाले सभी लोगों को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। गेट पर सुरक्षा व्यवस्था को भी बढ़ा दिया गया है। वहीं, रहमान खेड़ा से जुड़े आस-पास के गांव में रहने वाले लोगों को भी संपर्क कर उन्हें ग्रुप में काम काज के लिए निकले के लिए कहा जा रहा है।

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