लथरवा नदी पर नहीं है पुल, इसी नदी के रास्ते शिकारपुर, कुब्बा और मजहर गांव जाना होता है

सुमित्रा देवी के कल शाम घर नहीं आने पर परिजन रातभर खोजबीन करते रहे। गुरुवार को ग्रामीणों और परिजनों ने जंगल, पहाड़ी और नदी में उसकी तलाश की। इस दौरान लथरवा नदी के बालू में महिला का शव मिला। परिजनों ने बताया कि सुमित्रा देवी रोज की तरह जंगल गई थीं। देर शाम तक नहीं लौटीं तो चिंता हुई। गुरुवार को शव मिला। परिजनों और ग्रामीणों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराने का फैसला लिया। पप्पू यादव, जानकी यादव, राजू यादव, मनोज यादव, कपिल यादव, मिथलेश, बीरेन्द्र, भागवत, गोपाल यादव, मोती यादव, आशिष पासवान और भूपुन यादव ने बताया कि सरकारी व्यवस्था लचर है। पोस्टमार्टम में परेशानी होती है। इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। लथरवा नदी जंगली नदी है। इस पर कोई पुल नहीं है। इसी नदी के रास्ते शिकारपुर, कुब्बा और मजहर गांव जाना होता है। ये गांव घने जंगल में बसे हैं। इनकी आबादी करीब पांच से छह सौ है। सुमित्रा देवी के चार बेटियां और दो बेटे हैं। पति भूपुन यादव की दो पत्नियां हैं। मृतका सबसे बड़ी थीं भास्कर न्यूज | प्रतापपुर प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मैराग गांव की 55 वर्षीय सुमित्रा देवी की लथरवा नदी में बहने से मौत हो गई। वह बुधवार को जंगल में जानवर चराने और महुआ के पेड़ से डोरी तोड़ने गई थी। दिनभर बारिश हो रही थी। संध्या में वह जानवरों के साथ लौट रही थी। लथरवा नदी पार करते समय तेज बहाव में फंस गईं। इससे वह बालू में धंस गईं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इधर, रामपुर पहाड़ी के दुखन भारती की मौत गुरुवार को आहार में डूबने से हो गई। वह 70 वर्ष के थे। घर के पास स्थित भौरा आहर में प्लास्टिक निकालने गए थे। पानी लबालब भरा था। डूबने से उनकी मौत हो गई। वह शरीर से हल्के विकलांग थे। पत्नी एतवरिया देवी और पांच बच्चे हैं।

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