भास्कर न्यूज| लुधियाना पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग पॉलिसी के खिलाफ किसानों का विरोध तेज हो गया है। लुधियाना के गलाडा कार्यालय के बाहर जमीन बचाओ संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में किसान जत्थेबंदियां पिछले कई दिनों से मोर्चा लगाए बैठी हैं। भारी गर्मी और बारिश के बावजूद किसान 24 घंटे धरने पर डटे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक विधानसभा में इस पॉलिसी को लिखित रूप से रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, संघर्ष खत्म नहीं होगा। किसान नेताओं का आरोप है कि सरकार दोहरा रवैया अपना रही है। किसान नेता हरदीप सिंह ने कहा कि एक तरफ चंडीगढ़ में अधिकारियों और मंत्रियों के साथ गुप्त बैठकों में पॉलिसी लागू करने की रणनीति बनाई जा रही है, दूसरी तरफ जनता और मीडिया से कहा जा रहा है कि इसे वापस ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन खत्म करवाने के लिए सिर्फ लॉलीपॉप दे रही है, लेकिन यह रणनीति अब काम नहीं करेगी। किसानों को बेवकूफ समझने की भूल सरकार न करे। धरने में शामिल किसान मलकीत सिंह ने चेतावनी दी कि वे अपनी जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। जान दे देंगे, पर जमीन नहीं देंगे। अगर सरकार ने जबरन जमीन लेने की कोशिश की, तो उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा। इस झूठी सरकार को हम झाड़ू से साफ कर देंगे और उनके विधायकों को दिल्ली भेज देंगे। बलवंत सिंह ने बताया कि आंदोलन लंबा चलाने की योजना तैयार हो चुकी है। हर रात अलग-अलग गांवों की टीमें धरने पर रहेंगी। चाहे जितने दिन लग जाएं, लेकिन जब तक विधानसभा में यह नीति लिखित रूप से रद्द नहीं होती, तब तक एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की गलतफहमी है कि किसान डर जाएंगे या टूट जाएंगे। हमारी जमीन है, हमारा हक है। इसे छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी। गलाडा कार्यालय के बाहर किसान मोर्चा लगाए बैठे। किसानों ने साफ किया कि अब उन्हें सीएम भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की बातों पर भरोसा नहीं रहा। उनका कहना है कि सरकार हर बार बयान बदलती है, जनता को गुमराह करती है और मौखिक वादों के पीछे छिपती है। अब वे सिर्फ लिखित फैसले पर ही विश्वास करेंगे। धरना स्थलों पर माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। गलाडा कार्यालय के आसपास का इलाका लंबे समय से बंद जैसा माहौल झेल रहा है। दुकानदारों और व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है और रोजाना का कारोबार प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार को या तो स्पष्ट रूप से पॉलिसी रद्द करनी चाहिए या फिर किसानों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए। जमीन बचाओ संघर्ष कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया, तो आंदोलन को पूरे पंजाब में फैलाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में और भी गांवों से किसान लुधियाना पहुंचकर धरने में शामिल होंगे। धरने के बीच किसानों का मनोबल ऊंचा है। दिन में गर्मी और शाम को बारिश के बावजूद वे टेंटों के नीचे डटे हुए हैं। लंगर और पानी की व्यवस्था स्थानीय संगठनों व गांवों से आए स्वयंसेवकों की ओर से लगातार की जा रही है। किसान नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, बल्कि अपने अधिकार और भविष्य की है।


