इस साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को कोर्ट परिसर में हुई। सात घंटे तक चली लोक अदालत में पक्षकारों के आपसी सहमति से 4 लाख 98 हजार 942 मामलों को सुलझाया गया। इनमें 1.13 लाख केस पेंडिंग और 3 लाख 85 हजार 942 केस प्री-लिटिगेशन के शामिल थे। इस दौरान कोर्ट ने 26 करोड़ के अवार्ड पारित किए। जानकारी के अनुसार, शनिवार को लगी लोक अदालत में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला एवं सेशन जज ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने न्यायिक, प्रशासनिक, बैंक और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ मिलकर पक्षकारों से समझाइश कर राजीनामे से मुकदमों को निस्तारित करवाया। सबसे ज्यादा 1445 केस एनआई एक्ट कोर्ट में लेन-देन के थे। इन्हें सुलझा कर 16 करोड़ के अवार्ड पारित किए। पारिवारिक कोर्ट में 750 केसों और मोटर वाहन दुर्घटना कोर्ट में 114 केसों का निपटारा किया गया। इनमें 6.39 करोड़ के अवार्ड पारित किए। एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि सुबह 10 से शाम 5 बजे तक लोक अदालत चली। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। इससे पहले लोक अदालत के लिए मुख्यालयों और तहसीलों पर स्थित कोर्ट में बेंचों को गठन किया गया था। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से प्रकरण का निस्तारण होने पर सिविल मामलों में न्यायालय फीस लौटाई जाती है। पक्षकार जल्दी न्याय प्राप्त कर मुकदमेबाजी के तनाव से मुक्त हो जाते हैं। पक्षकार लंबित प्रकरणों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में रखवाने के लिए संबंधित कोर्ट से आग्रह कर सकते हैं। इसके अलावा यहां सुलझे हुए मामलों में वापस कोर्ट में अपील नहीं की जा सकती है।


