नवरात्र दौरान भक्तों ने घरों और मंदिरों में 9 देवियों की पूजा-अर्चना की। जबकि पहले नवरात्र में कई लोगों ने अपने घरों में खेत्री बोई और सुबह शाम पूजा-अर्चना करके ज्योति जलाई। वहीं अष्टमी और रामनवमी के दिन कई भक्तों ने माता की कंजक पूजन करके उन्हें प्रसाद बांटा। इसके बाद लोगों के खेत्री अपने घरों से निकालकर शहर के मंदिरों में जाकर रखी ताकि मंदिर वाले खेत्री को बहते पानी में जाकर प्रवाहित कर सके। वहीं टाउन हाल स्थित माता लौंगा वाली देवी मंदिर के बाहर लगने वाली रेहड़ी मार्केट में कई लोगों ने अपनी खेत्री रख दी। जिसमें खेत्री के अलावा माता रानी की चुनरी और अन्य पूजा सामग्री पड़ी रही। वहीं छोटे बच्चे इस पूजा सामग्री में से कुछ सामान निकाले रहे। शहर वासी नवलदीप, प्रदीप अग्नहोत्री, जगदीश शर्मा, रमेश शर्मा का कहना है कि इस तरह खेत्री और पूजा सामग्री फैंकना गलत है। लोगों को चाहिए कि वह खेत्री में पानी डालकर सकोरे से निकाले और गमले डालकर रखे ताकि सूखने के बाद मिट्टी में मिल जाए। वहीं खाली सकोरों को साफ करके उनमें पानी भरकर पक्षियों के लिए छत पर रखे। इससे गर्मियों में पक्षियों को बिना पानी के तरसना नहीं पड़ेगा।


