लोहड़ी 13 को शाम 4 बजे से, मकर संक्रांति पर नहीं अगले दिन दान किए जाएंगे चावल

भास्कर न्यूज | जालंधर नए साल के जश्न के बाद अब लोहड़ी का लोगों को बेसब्री से इंतजार है। पारंपरिक गीतों, पोशाकों में सजे-धजे लोग जब भंगड़ा और गिद्दे की धुन पर अग्नि में गेंहू की बेलियां, मूंगफली, गुड़, तिल आदि डालकर परिक्रमा करते हैं, नाचते-गाते हैं और पूजा-पाठ करते हैं, तो माहौल अलग रंग में नजर आता है। 14 जनवरी को सूर्य नारायण धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। मकर संक्रांति के दिन पानी में काले तिल और गंगाजल मिला कर स्नान करें। इससे सूर्य भगवान की कृपा होती है और कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर खाने में तिल का सेवन करना चाहिए। ये पर्व पितरों से संबंधित शुभ कर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण है। 14 जनवरी को श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि कर्म भी जरूर करें। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास खत्म होगा और अब सभी तरह के मांगलिक कर्मों के शुभ मुहूर्त मिलने लगेंगे। शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि 13 जनवरी को पंजाबी समुदाय के लोग भांगड़ा डालकर व लोहड़ी के गीत गाकर खुशी मनाते हैं। 13 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक भद्राकाल रहेगा। इसके बाद शाम 4 बजे से शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। अग्नि की परिक्रमा बिना चप्पल पहने लगाएं। इसके अलावा अग्नि में झूठा प्रसाद न फेंके। इस दिन नवविवाहित जोड़ों और बच्‍चों की पहली लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। लोहड़ी, पौष महीने की आखिरी रात को मनाई जाती है। इस दिन लोग लकड़ी जलाकर आग के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, गुड़ की बनी चीजें, मक्की के दानों की आहुति देते हैं और इसके चारों ओर लोग इकट्ठे होकर गीत गाए जाते हैं। इस त्योहार पर पंजाब में रात के खाने में मक्के की रोटी और सरसों का साग विशेष तौर पर बनाया जाता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *