भास्कर न्यूज|लोहरदगा झारखंड आंदोलन के जननायक झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक व दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर लोहरदगा जिले में उत्साह का माहौल है। झामुमो की वैचारिक विरासत और झारखंडी अस्मिता को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। दिशोम गुरु की जयंती के अवसर पर 7 फीट ऊंची प्रतिमा किस्को लाई गई है, जबकि लोहरदगा समाहरणालय परिसर के समीप 12 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा तथा जोरी पंचायत भवन परिसर में 6 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। तीनों प्रतिमाएं पूरी तरह बनकर तैयार हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण जिले के जोरी गांव निवासी, प्रसिद्ध मूर्तिकार दिलीप कुमार टोप्पो ने किया है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंडी समाज की आत्मा और संघर्ष की पहचान हैं। उनकी प्रतिमा झारखंड आंदोलन, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और आदिवासी-मूलवासी अस्मिता के संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनाए रखेगी। झामुमो से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रतिमा स्थापना का उद्देश्य केवल स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि झामुमो की विचारधारा समानता, सामाजिक न्याय और झारखंडी स्वाभिमान को जन-जन तक पहुंचाना है। पार्टी कार्यकर्ता प्रतिमा स्थापना को लेकर सक्रिय हैं और विधिवत अनावरण कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। मूर्तिकार दिलीप कुमार टोप्पो ने बताया कि यह प्रयास श्रद्धांजलि से कहीं आगे बढ़कर कला, संस्कृति और संघर्ष के संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु की प्रतिमा झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगी और युवाओं को अपने इतिहास व आंदोलन से जोड़ने का कार्य करेगी। उल्लेखनीय है कि दिलीप टोप्पो इससे पूर्व भी अनेक स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की प्रतिमाएं तैयार कर चुके हैं। हाल ही में किस्को चौक पर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा भी उनके द्वारा निर्मित की गई थी। वे कई बार अपनी निजी राशि से प्रतिमाएं बनाकर समाज को समर्पित कर चुके हैं, जिसे वे अपनी सांस्कृतिक जिम्मेदारी मानते हैं। दिलीप टोप्पो को उनकी कला साधना और समाजसेवी योगदान के लिए राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2005 में उन्हें झारखंड कला व सांस्कृतिक सम्मान से मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था। वे 2007 से 2013 तक राष्ट्रीय ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की सामान्य परिषद के सदस्य के रूप में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा ईजेडसीसी, कोलकाता की सामान्य परिषद में भी उन्होंने तीन वर्षों तक झारखंड राज्य का प्रतिनिधित्व किया है। उनका सपना है कि लोहरदगा और आसपास के क्षेत्र के युवाओं को कला के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जाए। उनका मानना है कि कला न केवल सांस्कृतिक पहचान का माध्यम है, बल्कि रोजगार और समाजसेवा का सशक्त जरिया भी बन सकती है।


