बीछवाल से म्यूजियम सर्किल तक 11 किमी रोड को सिक्स लेन के बीच में वन विभाग के करीब 90 से ज्यादा पेड़ और 70 से ज्यादा बिजली के खंभे आड़े आ रहे हैं। वन विभाग ने पेड़ काटने के बदले जमीन मांगी। वन विभाग और पीडब्ल्यूडी के बीच सहमति भी बनी। कलेक्टर ने जगह देने के लिए भी कहा मगर अब तक ना तो जगह तय हो पाई ना खंभे और पेड़ हटे। इसी वजह से 3 साल से सिक्स लेन का काम अटका हुआ है। दरअसल पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बीछवाल से म्यूजियक सर्किल के तक 11 किमी के लिए 33 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। पूर्ववर्ती सरकार ने काम शुरू कराकर 3 करोड़ रुपए भी दिए थे। मगर उसके बाद पहले आर्मी एरिया की एक पाइप लाइन बीच में आई। 6 से 10 महीने तक वो मामला अटका रहा। जैसे-जैसे आर्मी ने उसका निस्तारण किया तो सिक्स के लिए सड़क के बीच 70 से ज्यादा बिजली के खंभे आ गए। पीडब्ल्यूडी और बीकेसीईएल के बीच उनको हटाने को लेकर राशि को लेकर फैसला नहीं हो पाया। सिक्स लेन करने के लिए बीच में 90 के करीब पेड़ भी आ गए। उन पेड़ों काे काटे बिना सिक्स लेन बन नहीं सकती। पेड़ काटने के लिए वन विभाग ने तब तक के लिए मना कर दिया जब तक इसके बदले उन्हें अन्यत्र जमीन ना मिल जाए। जमीन पीडब्ल्यूडी के पास है नहीं। पीडब्ल्यूडी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जगह देने के लिए कहा। एक साल बीत गया मगर वन विभाग को जमीन नहीं मिली और काम वहीं का वहीं अटका है। जो 3 किमी सड़क बनाई भी वो भी जब सिक्स लेन बनेगी टूट जाएगी। म्यूजियम से हल्दीराम रोड वाला नाला भी बाकी कहने को हल्दीराम प्याऊ से म्यूजियम सर्किल तक सिक्स लेन बन गई मगर हैरानी की बात ये है कि मूल डीपीआर के हिसाब से अब तक यहां काम अधूरा है। हैरानी की बात ये है कि बीडीए ने भी इस काम को भुला दिया। भास्कर ने कुछ महीने पहले ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की थी तब बीडीए कमिश्नर ने फाइल मंगाई भी थी मगर उसके बाद फाइल फिर ठंडे बस्ते में डाल दी गई। यहां पानी निकासी के लिए नाला निर्माण होना था। डिवाइडर पर साइंस और मैथ्स के मॉडल, रेलिंग लगाने का भी प्रावधान था जो पूरी रोड पर कहीं नहीं दिख रहा। हालांकि खबर है कि ठेकेदार का कुछ भुगतान बाकी है मगर बीडीए को इसका निर्णय तो करना चाहिए। या तो ठेकेदार से काम पूरा कराए या नया टेंडर करे। सड़क को बीच में क्यों छोड़ दिया। छोटे-छोटे पॉकेट में काम करने से ठेकेदार को होगा नुकसान प्रशासन और आमजनों का तर्क है कि जहां पेड़ और खंभे हैं उतनी जगह छोड़कर पीडब्ल्यूडी काम करा सकता है मगर सवाल ठेकेदार का है। ठेकेदार बार-बार छोटे-छोटे पॉकेट लिए पूरी मशीनरी और सामान लाए तो उसे आर्थिक नुकसान हाेगा। इसलिए ठेकेदार ये काम कर नहीं रहा। ठेकेदार का कहना है कि एक बार सारी रोड क्लीयर मिलने के बाद एक साथ ही काम करेंगे। इसी वजह से म्यूजियम सर्किल से श्रीगंगानगर चौराहे तक का भी काम अटका हुआ है। इस लेन को बनाने में दीनदयाल सर्किल पर नगर निगम का कन्वेंशन सेंटर को भी तोड़ा जा सकता है। “मैं तो मांग ही कर सकता हूं। प्रशासन से जमीन मांगी है जो वन विभाग को दी जा सके। उसके बाद पेड़ कटेंगे, खंभे हटेंगे। तब पूरी होगी रोड। दीनदयाल सर्किल के आसपास काम कराना शुरू कर देंगे।”
-ओ.पी.मंडार, एसई, पीडब्ल्यूडी


