वर्कआउट-डाइट​ फिर भी फिटनेस नहीं, वजह…मानसिक थकान

आजकल फिटनेस एक्सपर्ट्स के पास ऐसे कई लोग पहुंच रहे हैं जो हेल्दी खाना खा रहे हैं, रेगुलर वर्कआउट कर रहे हैं, नींद का भी ध्यान रख रहे हैं, लेकिन फिर भी फिट नहीं दिखते। उनका शरीर सुस्त, थका हुआ और भारी महसूस होता है। चेहरे पर थकावट झलकती है, वजन भी कम नहीं होता और हमेशा एक अजीब-सी बेचैनी बनी रहती है। कई बार तो ब्लड रिपोर्ट्स भी नॉर्मल आती हैं, लेकिन व्यक्ति खुद को अनहेल्दी महसूस करता है। फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसे मामलों में अक्सर शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि मानसिक थकान और खुद से जुड़ाव की कमी होती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो अब सिर्फ हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज से काम नहीं चलेगा। खुद से जुड़ने का समय, माइंडफुलनेस, ध्यान और इमोशनल हेल्थ पर फोकस जरूरी है, तभी असली फिटनेस हासिल होगी। असली बैलेंस मानसिक शांति से आता फिटनेस कोच अमन सोनी कहती हैं कि आज की भागदौड़ भरी लाइफ में लोग सोचते हैं कि सिर्फ जिम जाकर और हेल्दी खाना खाकर फिट हो जाएंगे, लेकिन असली बैलेंस मानसिक और भावनात्मक शांति से आता है। इस वजह से अब वर्कआउट और डाइट के साथ ही मेंटल फिटनेस के लिए जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि महीने में ऐसे करीब 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं। जहां वर्कआउट और हेल्दी डाइट तो है, लेकिन मानसिक शांति नहीं। हर दिन 15 मिनट माइंड-सेट फिटनेस यानी खुद से जुड़ने का समय निकालना बहुत जरूरी है। चाहे वो ध्यान हो, संगीत सुनना, पेड़-पौधों से बात करना या सिर्फ शांत बैठना। बिना मानसिक शांति के, फिटनेस सिर्फ एक थका देने वाला रूटीन बन जाती है। हर दिन 15 मिनट खुद से जुड़ने का समय निकालना बहुत जरूरी केस 1 : रोज योग, फिर भी थकावट और वजन जस का तस: 28 साल की एक कॉर्पोरेट वर्कर हर सुबह 5 बजे उठकर योग करती हैं। ऑर्गेनिक खाना खाती हैं और मीठे से दूरी बनाए रखती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें हमेशा थकावट, भारीपन और लो एनर्जी महसूस होती है। कई बार वजन भी नहीं घटता, जिससे निराशा बढ़ जाती है। ध्यान और डीप ब्रीदिंग से स्ट्रेस मैनेजमेंट शुरू करने की सलाह दी गई। केस 2 : फिटनेस जर्नी में निवेश किया पर दिमाग शांत नहीं: 40 वर्षीय एक बिजनेस वुमन ने हेल्थ के लिए सब कुछ किया डाइट प्लान, पर्सनल ट्रेनर। उनका कहना है कि जब मन ही बेचैन हो, तो शरीर कब तक साथ देगा। रोज तनाव में रहना उनकी प्रोग्रेस को धीमा कर रहा है। अब वह मानसिक सुकून को लेकर अपने ऊपर काम कर रही हैं। केस 3 : समय पर खाना-व्यायाम, फिर भी भारीपन: 35 साल की स्कूल टीचर ने न्यूट्रिशनिस्ट से डाइट चार्ट बनवाया, हर दिन वॉक करती हैं और बाहर का खाना छोड़ चुकी हैं। बावजूद इसके उन्हें शरीर भारी लगता है, नींद पूरी नहीं होती। अब रात की नींद का रूटीन सुधारा व सोने से पहले मोबाइल से दूरी बना ली है। केस 4 : रनिंग और डाइट के बाद भी दिखी मानसिक थकावट: 34 साल के आईटी प्रोफेशनल सुबह दौड़ते हैं, हेल्दी मील खाते हैं और वीकेंड पर जिम जाते हैं, लेकिन काम का स्ट्रेस, देर रात तक लैपटॉप के आगे बैठना और नींद की कमी ने उनकी फिटनेस पर असर डाला है। उनका वजन स्थिर बना हुआ है और माइग्रेन की शिकायत भी रहती है। एक्सपर्ट की सलाह पर अब काम के बीच माइंडफुल ब्रेक लेकर हफ्ते में एक दिन पूरी तरह रेस्ट कर रहे हैं।

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