वर्ल्ड अपडेट्स:ब्रिटेन और जर्मनी ने द्विपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर किए, रक्षा सहयोग को मजबूत करना मकसद

ब्रिटेन और जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार एक द्विपक्षीय संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे केंसिंग्टन संधि कहा जा रहा है। इस संधि का मकसद यूरोप में बढ़ते खतरों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने गुरुवार को लंदन में इस संधि पर हस्ताक्षर किए। इस संधि में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले की स्थिति में मदद और सैन्य उपकरणों, जैसे कि लड़ाकू विमानों, के लिए संयुक्त निर्यात अभियान चलाने का वादा किया है। मर्ज ने कहा कि यह संधि ब्रिटेन के 2020 में यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (Brexit) के बाद दोनों देशों के बीच एक रिश्ते की शुरुआत है। स्टार्मर ने कहा कि यूरोप के सामने मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए दोनों देश मिलकर उनका सामना करेंगे। हालांकि, दोनों देश नाटो के सदस्य हैं, इसलिए संधि में सैन्य सहायता का वादा कितना सफल होगा, यह स्पष्ट नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… व्हाइट हाउस ने ट्रम्प के पाकिस्तान का दौरा करने के दावों को खारिज किया, कहा- यात्रा अभी तय नहीं व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पाकिस्तान का दौरा करने के दावों को खारिज कर दिया। व्हाइट हाउस ने कहा, “पाकिस्तान की यात्रा अभी तय नहीं की गई है।” पाकिस्तानी न्यूज चैनलों में खबरें थीं कि ट्रम्प सितंबर में पाकिस्तान और फिर भारत का दौरा करेंगे। हालांकि, बाद में इन चैनलों ने अपनी खबरें वापस ले लीं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने भी कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। आखिरी बार 2006 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने पाकिस्तान का दौरा किया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को बताया कि ट्रम्प 25 से 29 जुलाई तक स्कॉटलैंड जाएंगे। वहां वे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से व्यापारिक समझौते पर बात करेंगे। इसके अलावा, ट्रम्प और प्रथम महिला मेलानिया सितंबर में 17 से 19 तारीख तक ब्रिटेन की आधिकारिक यात्रा करेंगे, जहां वे किंग चार्ल्स से विंडसर कैसल में मुलाकात करेंगे। दावा- चीन और रूस के साथ त्रिपक्षीय सहयोग के लिए भारत तैयार नहीं, दोनों देशों से चर्चा की संभावना से इनकार किया रूस और चीन की तरफ से भारत के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को फिर से शुरू करने की वकालत के बीच सूत्रों ने बताया है कि भारत इस मुद्दों पर किसी भी बैठक के लिए सहमत नहीं है। एक सूत्र ने कहा, ‘इस समय रूस-भारत-चीन (RIC) फॉर्मेट की किसी भी बैठक पर सहमति नहीं बनी है। इसके कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं चल रही है।’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी गुरुवार को वीकली ब्रीफिंग में RIC फॉर्मेट को पुनर्जीवित करने को लेकर कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा, ‘यह एक ऐसा तंत्र है जहां तीन देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साथ आते हैं। जब यह बैठक होगी, तो हम तीनों देशों की सुविधा को देखते हुए तारीख तय करेंगे और इसकी जानकारी देंगे।’ भारत के विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के उस बयान के कुछ महीने बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि त्रिपक्षीय वार्ता फिर से शुरू होनी चाहिए। भारत, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय संवाद का मकसद ग्लोबल और क्षेत्रीय स्तर पर रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और पश्चिमी एकाधिकार (यूनिपोलर व्यवस्था) को संतुलित करना है। अमेरिका ने पाकिस्तान समर्थित TRF को आतंकी संगठन घोषित किया, इसी ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी अमेरिका ने पाकिस्तान समर्थित द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) की लिस्ट में डाल दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। मार्को रुबियो ने बयान में लिखा, ‘लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक मुखौटा और प्रॉक्सी, TRF ने 22 अप्रैल, 2025 को भारत के पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। यह 2008 में मुंबई हमलों के बाद लश्कर का भारत में नागरिकों पर किया गया सबसे घातक हमला था।’ ‘TRF ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है, जिनमें सबसे हालिया 2024 का हमला भी शामिल है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने पहलगाम हमले के लिए न्याय का आह्वान किया था। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा की यह कार्रवाई हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा, आतंकवाद का मुकाबला करने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के प्रति ट्रम्प प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।’ पूरी खबर पढ़ें…

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