वसंत से रंगपंचमी तक रोज बिना दोहराए गाते हैं 150 से अधिक भजन, कृष्ण ही नहीं, गणपति, श्रीराम और नृसिंह पर भी बनाए होरियों के…

मंडली के 68 वर्षीय मुख्य गायक गोपाल अटल बताते हैं कि उन्हें ये विधा उनके गुरु से मिली है, जिन्होंने सातवीं कक्षा में उन्हें भजन गाने की प्रतिज्ञा दिलाई थी। यहां पर हर प्रमुख त्योहार शिवरात्रि, जन्माष्टमी पर भजनों और शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम किए जाते हैं। बसंत के बाद एक महीना तो सावन में 15 दिनों तक रंगदारी की जाती है। नागौर. हारमोनियम पर भजन गाते व्यापारी गोपाल अटल। गोपाल अटल हारमोनियम बजाने के साथ 6 सौ से अधिक भजन गा सकते हैं। तबले के माहिर नरेंद्र जोशी 25 ताल बजाने में माहिर हैं। लीलाधर दिवाकर, प्रभुदयाल जांगीड़, धीरेंद्र मिश्रा, नंदकिशोर, श्याम झंवर और सत्यनारायण चांडक भी इसी मंडली का हिस्सा हैं। गोपाल बताते हैं कि रात के समय में इसी राग में खेलत फाग श्री गण राजा.., खेलन लाग्यो मेरो श्यामसुंदर…, बावरी बन आई, तुझे होरी कौन खिलाई…, मानो-मानो जी छैल नंदलाल… जैसे भजन व पद गाए जाते हैं। इनके गुरु पूसाराम सोनी ने मीरा, सूरदास व तुलसीदास भजनों का हाथ से लिखा संग्रह देकर गए, जिसमें छंद, सोरठा, दोहे, लोकोक्तियां इस तरह की 20 से अधिक किताबों का संग्रह है। भजनों की किताब जिसमें 2 हजार साल पुराने 3 हजार से अधिक भजन हैं। श्रीकृष्ण ही नहीं, भगवान राम, गणेश व नृसिंह भगवान के होरी के गीत भी गाते हैं। कविता स्वामी | नागौर फाल्गुन अभी 2 दिन दूर है, लेकिन फाग गीतों के रंग में नागौर अभी से सराबोर होने लगा है। तबले की थाप और हारमोनियम से निकले सुरों के साथ राग काफ़ी में सजे स्वरों की जुगलबंदी कानों में पड़ते ही ऐसा आभास होने लगता है जैसे होरी आज ही हो और गोपियों के साथ कान्हा साक्षात सामने ही होरी खेल रहे हों। नगर सेठ बंशीवाला मंदिर में ऐसा माहौल इन दिनों रोज देखने को मिल जाएगा। यहां बसंत पंचमी के बाद से ही रंगदारी का सिलसिला शुरू हो गया है। शाम की आरती के बाद रात को 9 बजे मंदिर में जाने पर तबले, हारमोनियम और होरी के गीतों के राग सुनाई देने लगती है। मंदिर प्रांगण में गायकों की मंडली सजी मिलेगी। ये सभी कोई पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि दिन में अपना व्यापार और दुकानें संभालते हैं और रात में मंदिर में आकर भक्तिगीतों में मगन हो जाते हैं। ये लोग पिछले 50 साल से लगातार यहां रंगदारी कर मंदिर की 2 सौ साल पुरानी परंपरा निभा रहे हैं। नागौर. तबला बजाते व्यापारी नरेंद्र जोशी। मंडली के सदस्यों ने बताया कि हर एकादशी पर रात से लेकर सुबह तक भक्ति गीत गाए जाते हैं। जागरण की परंपरा सालों से निभाई जा रही है। मंडली में कुछ नए लोग भी जुड़ते रहते हैं, लेकिन सभी राग व ताल में नहीं गा सकते। हम भक्ति के लिए भजन गाते हैं। नई पीढ़ी को न शास्त्रीय संगीत की समझ है न ही राग व ताल की।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *