सत्ताधारी पार्टी का विधायक होने के अपने-अपने फायदे नुकसान हैं। अध्यात्म और सियासत के मेलजोल वाले एक चर्चित विधायक पिछले दिनों जनता से जुड़े महकमे के मंत्री से मिलने गए। मुलाकात होते ही विधायक फट पड़े। खूब खरी-खोटी सुनाई। विधायक उनकी सिफारिश वाले तबादले नहीं होने से नाराज थे। सबसे बड़ी पंचायत में मंत्री के चैंबर में यह मुलाकात हो रही थी। वहां वैसे भी चहल पहल रहती है, इसलिए विधायक की तेज आवाज कइयों ने सुन ली। सुना है, विधायक ने मंत्री को 15 दिन का अल्टीमेटम दे दिया है। विधायक को उनके प्रतिद्वंद्वी केंद्रीय मंत्री पर शक था कि शायद उन्होंने उनके काम अटकाए हैं। यह बात मंत्री से भी कह दी कि आप जिनके इशारे पर चल रहे हो वह ठीक नहीं है। मंत्री ने अफसर के खिलाफ भेजा शिकायतों का पुलिंदा, फिर भी नहीं हटा पाए अफसरों से तालमेल बैठकर चलना भी सियासी मैनेजमेंट और सरकारी मैनेजमेंट का बड़ा पार्ट है। यह कला हर किसी में नहीं होती। कई बार कला और अर्थशास्त्र के बीच भी हित टकरा जाते हैं। जनता से जुड़े एक विभाग के मंत्री अफसर को हटवाने की तैयारी में काफी समय से जुटे हैं, लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिल रही। अफसर के खिलाफ ठोस शिकायतों के पुलिंदे तक टॉप लेवल तक भेज दिए, लेकिन अब तक इसका कोई असर नहीं हुआ। सुना है अफसर ने भी कोई बड़ा तोड़ निकाल लिया है, इसीलिए मंत्री की नहीं चल पाई। किसने उल्टा लगाया बड़े आयोजन का होर्डिंग, पास की इच्छा वाले क्यों हुए परेशान राजधानी में फिल्मी सितारों के जमघट वाले आयोजन को लेकर जितना उत्साह है, इतने ही नए-नए किस्से भी सामने आ रहे हैं। अब इंटरनेशनल आयोजन करवाएंगे तो पावर पॉलिटिक्स भी रंग दिखाएगी। जल्दबाजी में गलतियां भी होंगी। आयोजन के होर्डिंग में शामिल चेहरों को लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा होने लगी। इसी बीच आयोजन के शहर भर में होर्डिंग लगाए गए। जल्दबाजी में कुछ होर्डिंग उल्टे लग गए। अब चौक चौराहों की गलतियां छिपते थोड़ी ही हैं। दूसरी तरफ इतने बड़े आयोजन के लिए रसूखदार और भद्रजन सम्मान के लिए पास की उम्मीद भी करते हैं, लेकिन जहां से पास की उम्मीद थी वहां की जगह पास लेने का पता और ही हो गया। बड़े अफसर और विपक्षी विधायक के बीच लंबी चर्चा का राज प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में सियासत से लेकर ब्यूरोक्रेसी की कई अंदरूनी बातें सहज रूप से बाहर आ जाती हैं। एक बड़े अफसर और विपक्ष के विधायक के बीच चाय पर लंबी चर्चा हुई। अब सबसे बड़ी पंचायत में किसी के साथ बैठक हो और वह गुप्त रह जाए ऐसा हो ही नहीं सकता। अब गलियारों में अफसर और विधायक की चाय पर चर्चा को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। बड़े अफसर सरकार की गुड बुक में हैं, पिछली सरकार में भी अच्छी पोजिशन में ही रहे हैं। विपक्षी विधायक से सरकार की गुडबुक वाले बड़े अफसर यू ही तो नहीं मिले होंगे। कोई समीकरण सेट करने का प्रयास भी तो हो सकता है। बड़े नेताजी के सलाहकार से कौन परेशान? सत्ता की राजनीति में पावर ही सब कुछ है। जहां पावर होती है वहां हिस्सेदार खूब मिल जाते हैं। कमजोरी का हिस्सेदार कोई नहीं होता। पावर वाले एक बड़े नेताजी के यहां भी ऐसे ही सलाहकार पहुंच गए। अब पुराने जमे सलाहकारों का नए सलाहकार से परेशान होना स्वाभाविक है। नए सलाहकार के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बड़े नेताजी के शुभचिंतकों ने भी सलाह दे दी है। दरअसल, नए सलाहकार ने पहले भी कई नेताओं को सलाह दी थी लेकिन उनके सारे दांव उल्टे ही पड़े हैं, मतलब गड़बड़ तो है। विधायकों का जुगाड़ तंत्र चर्चा में, बहती गंगा में हाथ धोने का प्रेक्टिकल बहती गंगा में हाथ धोने की कहावत का महत्व नेताओं से ज्यादा कौन समझ सकता है। सबसे बड़ी पंचायत में सत्ता वाली पार्टी के विधायकों ने प्रदेश के मुखिया के स्वागत का पुराना ट्रेड शुरू किया। बाजार से गुलदस्ते मंगवाकर स्वागत तो होता ही है लेकिन कई विधायकों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। सबसे बड़ी पंचायत के परिसर में एंट्री गेट से लेकर सब जगह अच्छे फूल खिले रहते हैं। कुछ विधायकों ने स्वागत में ताजे फूल वहीं से तोड़कर स्वागत की रस्म निभानी शुरू कर दी। न बाजार से गुलदस्ते मंगवाने का झंझट न लेट होने का डर। विधायकों के इस जुगाड़ से अब गार्डन और फूलों की देखरेख करने वाले परेशान हैं, क्योंकि अब तो बगिया से फूल रोज ही टूट रहे हैं। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें विधानसभा गतिरोध में किसने लंबा खिंचवाया समझौता?:ऑडियो के बाद ऑफिसर को AI का खौफ, सच बोलने पर लगी फटकार


