डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे कस्टोडियन भूमि विवाद के स्थायी समाधान के लिए विधायक यूनुस ख़ान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उपखंड डीडवाना की निष्क्रांत (कस्टोडियन) भूमि पर दशकों से रह रहे वास्तविक कब्जाधारियों को विधिसम्मत नियमन, आवंटन और नामांतरण दिलाने की मांग की गई। विधायक यूनुस ख़ान ने बताया कि शहर और ग्रामीण अंचलों में सैकड़ों परिवार 50-60 वर्षों से इन भूमियों पर मकान, दुकान, खेती और अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्थायी रूप से बसे हुए हैं। कई लोग कर भी अदा करते रहे हैं, लेकिन भूमि आज भी ‘कस्टोडियन’ दर्ज होने के कारण उन्हें स्वामित्व के वैधानिक अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र परिवार कानूनी अनिश्चितता, सरकारी प्रक्रियागत अड़चनों और सामाजिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिसे अब दूर करना आवश्यक है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस विषय को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगकर आवश्यक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों को राहत मिल सके, इसके लिए सरकार संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ेगी। वहीं, शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने जानकारी दी कि विभाग कस्टोडियन भूमि प्रकरणों की विशेष समीक्षा कर रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे, सत्यापन और नियमन प्रक्रिया को तेज करने के लिए जिला स्तरीय समिति गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है। ज्ञापन में विधायक ने विभाजनकालीन ऐतिहासिक और विधिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009 के निर्देशों और जिला कलेक्टर नागौर के 11 अप्रैल 2011 के आदेश के अनुसार डीडवाना उपखंड की समस्त कस्टोडियन भूमि ‘सिवायचक’ में परिवर्तित की जा चुकी है।
प्रदेश के अन्य जिलों में हजारों काश्तकारों को खातेदारी अधिकार मिल चुके हैं, लेकिन डीडवाना के पात्र परिवार अब भी इस प्रक्रिया से वंचित हैं। विधायक ने एक विशेष सर्वे अभियान चलाकर वास्तविक कब्जाधारियों की पहचान और पारदर्शी आवंटन सुनिश्चित करने की मांग रखी। विधायक यूनुस ख़ान ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार व जिला प्रशासन संयुक्त रूप से शीघ्र, पारदर्शी एवं मानवीय समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक पात्र परिवार को उसका वैधानिक अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक प्रयास जारी रहेंगे।ज्ञापन सौंपने के दौरान अनेक गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहे।


