विपक्ष का वार… वार्डबंदी सिर्फ सियासती लाभ के लिए प्रधान ने कहा- 18 फरवरी को हाईकोर्ट में देंगे जबाव

कांग्रेसी पार्षद प्रवीन भाटिया का कहना है कि आम आदमी पार्टी ने सिर्फ कांग्रेस व अकाली दल के पार्षदों के वार्डों के साथ छेड़छाड़ की गई थी जबकि आम आदमी पार्टी के पार्षदों के वार्डों के साथ छेड़छाड़ नहीं कई गई थी। उनमें बेहद कम कटिंग की गई थी ताकि वहां के पार्षदों को आने वाले चुनावों में और स्ट्रांग किया जा सके। अकाली दल और कांग्रेस के कई वार्डों को काट कर छोटा कर दिया गया था। इसके अलावा कई जनरल कैटागरी को एससी रिजर्व व कई एससी रिजर्व सीटों को जनरल कर दिया गया था। भास्कर न्यूज| नवांशहर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने नवांशहर नगर कौंसिल के चुनाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने सरकार द्वारा की गई नई वार्ड बंदी में गंभीर कमियां पाई हैं। नवांशहर और पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों पर माननीय हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल एक कानूनी अड़चन है, बल्कि यह जमीनी स्तर की राजनीति और प्रशासन को पूरी तरह से प्रभावित करने वाला है। 18 फरवरी को सरकार अपने डेटा को सही ठहराने के लिए मजबूत हलफनामा पेश करेगी।चुनाव टलने की स्थिति में बजट पास होने और नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने में देरी हो सकती है। नवांशहर में कई वार्डों में एससी व बीसी आबादी बहुत ज्यादा है। अगर हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा वार्ड बंदी होती है तो कई संभावित उम्मीदवारों की मेहनत पर पानी फिर सकता है क्योंकि उनके वार्ड की श्रेणी जनरल से आरक्षित व आरक्षित से जनरल हो सकती है। विपक्षी दलों ने सरकार पर “राजनैतिक लाभ के लिए वार्डबंदी’ करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सत्ताधारी आप सरकार ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए वार्डों की सीमाओं को मनमाने ढंग से बदला है। माननीय कोर्ट की ओर से नगर कौंसिल चुनावों से ठीक पहले की गई वार्डबंदी में गंभीर कमियां पाई गई हैं। नियमों के विपरीत कुछ वार्डों की आबादी बहुत कम 1000 से लेकर 1500 के बीच रखी गई है, जबकि कुछ में यह 4000 से ऊपर है। यह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। इसके अलावा आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई है। अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों के निर्धारण में गड़बड़ी के आरोप हैं। जहां इन वर्गों की आबादी अधिक है, उन्हें सामान्य कर दिया गया और इसके विपरीत भी किया गया। इसके अलावा एक मुख्य कारण अस्पष्ट नक्शे और सीमाएं भी हैं। नए नक्शों में गलियों और मोहल्लों की स्पष्ट जानकारी नहीं है। निवासियों को यह भी नहीं पता कि उनका घर अब किस वार्ड के अंतर्गत आता है। नोटिफिकेशन जारी करने और उस पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जनता को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। अगले वर्ष विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। अगर इन चुनावों में आम आदमी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ता है तो इसका सीधा असर आने वाले विधान सभा चुनावों पर होगा। यह आम आदमी पार्टी नहीं चाहती है। यही कारण रहा है कि कोर्ट में कई केस दाखिल होने के बाद भी मंगलवार को पंजाब के मुख्य सचिव की ओर से कोई भी जबाब दायर नहीं किया गया जिसके बाद ही माननीय हाइकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए चुनावों पर रोक लगा दी और 18 फरवरी को जबाव मांगा है। जब तक पंजाब सरकार इन सभी आपत्तियों पर संतोषजनक हलफनामा पेश नहीं करती, तब तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती। ^नियमों के अनुसार ही वार्डबंदी की गई है। उन्होंने कहा कि 18 फरवरी को सरकार की ओर से जबाव दाखिल किया जाएगा। बलविंदर कौर , प्रधान, नगर कौंसिल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *