विभावि में 29 जनवरी से जनजातीय भाषा संस्कृति पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

भास्कर न्यूज | हजारीबाग विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के संयुक्त तत्वावधान में विजन 2047 -जनजातीय भाषाएं, संस्कृति व भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 29 जनवरी से हो रहा है। 31 जनवरी तक चलनेवाली संगोष्ठी में 10 राज्यों के 131 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया है। देशभर के प्रख्यात विद्वान, भाषाविद् भाग ले रहे हैं। तीन दिनों में 21अतिथि वक्ता व्याख्यान देंगे। इसमें 18 तकनीकी सत्र का आयोजन किया जाना है। संगोष्ठी में प्रो. शैलेंद्र मोहन निदेशक, केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर प्रख्यात भारतीय भाषाविद् पद्मश्री प्रो. अन्विता अब्बी, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सरोज शर्मा, पूर्व कुलपति एवं वर्तमान सदस्य सचिव और अकादमी अध्यक्ष, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली डॉ सच्चिदानंद जोशी, भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के शैक्षिक सलाहकार प्रो चंदन श्रीवास्तव, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो पतंजलि मिश्रा, सेंटर फॉर अप्लाइड लिंग्विस्टिक्स एंड ट्रांसलेशन स्टडीज हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रख्यात भाषाविद प्रो पंचानन मोहती, कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रो.ए आर बंगोपाध्याय, नागालैंड विश्वविद्यालय कोहिमा के प्रो रवि रंजन कुमार, नेहू विश्वविद्यालय मेघालय के प्रो ओमप्रकाश जैसे प्रख्यात विद्वान इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में आमंत्रित अतिथि वक्ता के रूप में भाग ले रहे हैं।

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