भास्कर न्यूज | जालंधर आज लोहड़ी है। नए साल की शुरुआत के बाद पंजाबी समुदाय के इस महत्वपूर्ण पर्व का सभी बेसब्री से इंतजार करते हैं। पारंपरिक गीतों, ढोल-नगाड़ों की आवाज से गूंजते आसमान और पारंपरिक पोशाक में सजे-धजे लोग, भांगड़ा और गिद्दा करते हुए आग जलाकर, उसमें गेंहू की बेलियां, मूंगफली, गुड़, तिल आदि डालकर परिक्रमा करते, नाचते-गाते और पूजा करते हैं। पंजाब के कई क्षेत्रों में इसे ‘लोही’ या ‘लोई’ भी कहते हैं। लोहड़ी के इस पर्व का शुभ मुहूर्त आज शाम 5:42 से शुरू होकर रात 8:12 तक और फिर 9 बजे से 10:48 तक रहेगा। शहर में कई जगहों पर कार्यक्रम होंगे। वैसे तो ये पंजाबियों का मुख्य पर्व है, लेकिन आज हर धर्म और समुदाय के लोग इसे मनाते हैं। इस दिन नवविवाहित जोड़ों और बच्चों की पहली लोहड़ी भी धूमधाम से मनाई जाती है। लोहड़ी, पौष महीने की आखिरी रात को मनाई जाती है। इस दिन लोग लकड़ियां जलाकर उसके चारों ओर परिक्रमा करते हुए नाचते-गाते हैं। इस त्योहार पर पंजाब में रात के खाने में मक्के की रोटी और सरसों का साग विशेष तौर पर बनाया जाता है। इस पर्व को भारत के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नामों के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। यहां के लोग मकर संक्रांति के तौर पर इसे मनाते हैं। कहा जाता है िक इस दिन भगवान सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। वहीं दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में मनाया जाता है। मॉडल हाउस के पंडित विजय शास्त्री ने बताया कि इस हफ्ते के आखिरी दिनों में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। लोहड़ी के पर्व से जुड़ी दुल्ला भट्टी की पौराणिक कहानी के अनुसार, अकबर के शासनकाल में दुल्ला भट्टी नामक युवक ने पंजाब की लड़कियों को अमीर सौदागरों के चंगुल से छुड़वाया और उनकी शादी हिंदू लड़कों से करवाई थी। तब से दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि से सम्मानित किया जाने लगा और हर साल हर लोहड़ी पर दुल्ला भाटी से जुड़ी यह कहानी सुनाई जाती है।


