मध्य प्रदेश के जिलों के प्रभारी मंत्री वीबी-जी राम जी अधिनियम को लेकर लगातार प्रेसवार्ताएं कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को ग्वालियर पहुंचे प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने अधिनियम के उद्देश्यों और फायदों की जानकारी दी। उन्होंने इस अधिनियम को ग्रामीण भारत को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रेसवार्ता के दौरान तुलसीराम सिलावट ने कहा कि यह अधिनियम केवल पिछली व्यवस्था का नाम बदलना नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति का व्यापक पुनर्गठन है। उन्होंने बताया कि यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अनुभवों से सीखकर उसकी संरचनात्मक कमियों को दूर करता है। मंत्री सिलावट ने स्पष्ट किया कि अब ग्रामीण रोजगार को केवल अल्पकालिक राहत तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे टिकाऊ अवसंरचना, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और आजीविका सृजन से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस अधिनियम के तहत, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम से कम 125 दिन मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायित्व आएगा और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी। सिलावट ने यह भी बताया कि किसानों और कृषि श्रम बाजार पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े, इसके लिए अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। राज्यों को बुवाई और कटाई के समय अधिकतम 60 दिनों तक सार्वजनिक कार्यों में विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है, जिससे किसान और श्रमिक दोनों के हितों में संतुलन बना रहेगा। तुलसीराम सिलावट ने पूर्ववर्ती योजनाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तक की योजनाएं गांधी और नेहरू परिवार तक सीमित थीं, लेकिन अब उन्हें राष्ट्र से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अधिनियम आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण भारत की नींव रखेगा।


