उदयपुर से असारवा (अहमदाबाद) की यात्रा कर रहे वीर भूमि एक्सप्रेस के एक यात्री को उस समय भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उसे 4:30 बजे बोर्डिंग के दौरान उनका फर्स्ट एसी कोच गंदगी से लथपथ मिला। प्रीमियम श्रेणी का किराया चुकाने के बावजूद कोच की हालत इतनी खराब थी कि वहां बैठना भी दूभर था। कोच अटेंडेंट और सुपरवाइजर से बात करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। ताजा मामला वीर भूमि एक्सप्रेस (19315) का है, जहाँ फस्र्ट एसी जैसे महंगे कोच में सफाई की भारी कमी और रेलवे स्टाफ की संवेदनहीनता सामने आई है। हैरानी की बात तब हुई जब रेलवे हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर अधिकारी ने यह अजीबोगरीब तर्क दिया कि सफाई कर्मचारी सुरक्षा कारणों से सुबह 6 बजे से पहले नहीं आएंगे। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए देवेंद्र सोमानी ने बताया कि 19 जनवरी 2026 को उदयपुर से असारवा की यात्रा के दौरान कोच एच-1 (सीट डी ) में चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी। यात्री ने तड़के 4.30 बजे से ही सफाई के लिए प्रयास शुरू किए। कोच अटेंडेंट ने सहयोग किया, लेकिन ओबीएचएससुपरवाइजर ने कई बार कॉल करने के बावजूद फोन नहीं उठाया। शिकायत यात्री ने रेल मदद पोर्टलपर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बिना किसी समाधान या सफाई के मात्र 3 घंटे के अंदर ही शिकायत को बंद कर दिया। यात्री ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया कि क्या घंटों गंदगी के बीच सफर करना ही रेलवे की नजर में यात्री सुरक्षा है? मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब ड्यूटी पर तैनात टीटीई कटारा ने भी इसे अपनी जिम्मेदारी न बताते हुए पल्ला झाड़ लिया और यात्री की मदद करने के बजाय वहां से चले गए। यात्री का आरोप है कि रेलवे की सेवाओं के आउटसोर्सिंग के कारण अब कोई भी अधिकारी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है। यात्री ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि ऐसी अव्यवस्था न केवल आम जनता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है, बल्कि देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों के सामने भी भारतीय रेल की बेहद खराब छवि पेश करती है। इस मामले में अब यात्री ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही और उचित मुआवजे की मांग की, ताकि भविष्य में किसी अन्य यात्री को ऐसी गरिमाहीन स्थिति का सामना न करना पड़े।


