कोंडागांव में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के वेयरहाउस में चावल हेराफेरी के मामले में जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस भ्रष्टाचार में शासन-प्रशासन की मिलीभगत है और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। जिला कांग्रेस महामंत्री रितेश पटेल ने बताया कि वेयरहाउस के गोदाम प्रभारी सहित कलेक्टर को मामले की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इसके बावजूद समय पर कोई भी अधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा, जिससे मामले की गंभीरता पर संदेह पैदा होता है। रितेश पटेल ने आरोप लगाया कि जानकारी मिलने के बाद भी निरीक्षण में जानबूझकर देरी की गई। इसका उद्देश्य हेराफेरी में शामिल वेयरहाउस कर्मियों को अपनी गलती छुपाने का पर्याप्त समय देना था। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान चावल की बोरियों को दूसरी जगह रखा गया होगा और सील लगाकर सबूतों से छेड़छाड़ की गई होगी। निरीक्षण से पहले कागजों में खेल सुधारने का आरोप कांग्रेस महामंत्री के अनुसार, जब तक निरीक्षण टीम पहुंचेगी, तब तक सारा खेल “कागजों में सही” दिखा दिया जाएगा। दोषी यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि कोई हेराफेरी हुई ही नहीं। उन्होंने इसे गरीबों के हक के चावल के साथ खिलवाड़ और प्रशासनिक संरक्षण का सीधा मामला बताया। नान घोटाले पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी रितेश पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार आम बात है और नान घोटाला कोई नया मामला नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने निष्पक्षता के साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने पर बाध्य होगी।


