व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार ही जीवन में सुख या दुख मिलता है

भास्कर न्यूज | बालोद प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद के तत्वाधान में किलकारी मैदान कॉलेज रोड में आयोजित वाह जिंदगी वाह शिविर के दूसरे दिन में मुंबई से आए अंतरराष्ट्रीय प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर प्रोफेसर ईवी गिरीश ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति अंदर से शांत और सशक्त होता है और सत्य के आधार पर जीवन जीता है। प्रो. गिरीश ने तनाव और उसकी वास्तविकता पर हुए बताया कि परिस्थिति या बाहरी चुनौतियां हमें तनाव देती हैं, यह गलत अवधारणा है। वास्तव में यह हमारी प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है। यदि हम स्वयं को मजबूत और शक्तिशाली बना लें, तो परिस्थितियां हमारे ऊपर हावी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, मेरे जीवन में सफलता का कारण भी और दुख का कारण भी मैं स्वयं हूं। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि स्वयं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कहा कि पांच महीने का बच्चा तैरना सीख सकता है, लेकिन हम 15 साल के बच्चे को डर दिखाकर पानी में जाने से रोकते हैं। यह हमारी गलत धारणाओं का परिणाम है। उनका कहना था कि दो व्यक्तियों के बीच कर्म का ट्रांसफर संभव नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार जीवन में सुख या दुख मिलता है। यदि हम इसे गहराई से समझ लें, तो सब बैहतर होगा। स्नेह, मुस्कुराहट, शक्ति और निडरता जैसे गुणों को आप अपनाएं, खुश रहेंगे इसके प्रथम दिन उद्घाटन समारोह में प्रोफेसर ई.वी. गिरीश ने कहा कि ईश्वर ने सभी प्राणियों में मुस्कुराने की कला केवल मनुष्य को दी है। उन्होंने उपस्थित लोगों को मुस्कुराने के लिए व्यायाम भी कराए और बताया कि मनुष्य अपनी मुस्कुराहट से स्वयं खुश रह सकता है और दूसरों को भी प्रसन्न कर सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्य साझा किया कि 1 साल का बच्चा 24 घंटे में लगभग 300 बार मुस्कुराता है, जबकि बड़े होने पर यह संख्या घट जाती है। उन्होंने उपस्थित लोगों से सवाल किया कि क्या हमारी मुस्कुराहट पिछले समय की तुलना में बेहतर हुई है या घट गई है। उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को स्नेह, मुस्कुराहट, शक्ति और निडरता जैसे दिव्य गुण अपनाने का सुझाव दिया।

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