व्यावसायिक नजर आता है फीस का स्ट्रक्चर:चैरिटेबल स्कूल बनकर कामर्शियल फीस वसूल रहे हैं प्रदेश में नामी संस्थान न समाजसेवा, न ही किसी प्रकार की राहत

राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में कई चैरिटेबल और धार्मिक संस्थाएं शैक्षणिक संस्थान चल रहे हैं। ये संस्थाएं सामाजिक और चैरिटेबल कार्यों के नाम पर आयकर और संपत्तिकर में भारी छूट का लाभ ले रही हैं। लेकिन यदि इन संस्थानों के स्कूलों और कॉलेजों की फीस का स्ट्रक्चर देखा जाए, तो वह पूरी तरह व्यावसायिक नजर आता है। वहीं जिन सामाजिक या चैरिटेबल कार्यों के आधार पर इन्हें छूट दी जाती है, वे कार्य भी समाज में दिखाई नहीं दे रहे हैं। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में 400 से अधिक निजी शैक्षणिक संस्थान संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 90 फीसदी स्कूलों का पंजीकरण धार्मिक या चैरिटेबल संस्थाओं के नाम पर किया गया है। इनमें कई स्कूलों की फीस सामान्य है, लेकिन कुछ नामी और बड़े स्कूलों की फीस मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। सिर्फ यूजर चार्ज ही वसूला जा रहा है महापौर मीनल चौबे ने कहा कि राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों के तहत निजी स्कूलों से संपत्तिकर की वसूली की जाए। इसी के तहत इस वर्ष कई स्कूलों को डिमांड बिल भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल वर्षों से धारा 12 ए के नाम पर छूट ले रहे हैं, जबकि फीस स्ट्रक्चर पूरी तरह व्यावसायिक है। नियमों के अनुसार उनसे केवल यूजर चार्ज लिया जा रहा है, लेकिन इस छूट की व्यवस्था पर पुनर्विचार जरूरी है। बहस का मुद्दा, स्कूलों को मिले प्रॉफिट की छूट छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि स्कूलों का संचालन ट्रस्ट या सोसायटी के माध्यम से ही होता है। नामी स्कूल फीस के माध्यम से कमाई तो करते हैं लेकिन इस कमाई को प्रॉफिट की तरह खर्च नहीं कर पाते। इसलिए उन्हें टैक्स की छूट मिलती है। स्कूलों को प्राइवेट लिमिटेड में कनवर्ट करने की छूट मिले। सरकार उस प्रॉफिट से फिर टैक्स मिले। यह 53 शैक्षणिक संस्थाएं ले रहीं संपत्तिकर से छूट नगर निगम के पास संपत्तिकर से छूट लेने वाले 53 स्कूलों की सूची है। इसमें महावीर हायर सेकेंडरी स्कूल गुढ़ियारी, कर्मा विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, एम.वाणी पद्मावती स्कूल, श्रीचंद सचदेव लिटिल प्रीट्स स्कूल, देशबंधु हायर सेकेंडरी इंग्लिश मीडियम स्कूल, आदर्श विद्यालय इंग्लिश मीडियम स्कूल, होली क्रॉस स्कूल, सेंट मैरी स्कूल, शंकर नगर विद्या मंदिर, एमजीएम स्कूल, वाधवा स्कूल, श्रीराम संगीत कॉलेज, पूर्णिमा पब्लिक स्कूल, होली क्रॉस बैरनबाजार, श्रीराय बहादुर भूतनाथ डे चैरिटेबल ट्रस्ट, सालेम इंग्लिश स्कूल, जेडी डागा स्कूल, स्कॉलर्स स्कूल, यूनाइटेड चर्चनार्थन इंडिया ट्रस्ट, एसोसिएशन सेंटपॉल स्कूल, जेके दानी पूर्व माध्यमिक शाला, ब्रह्मविद स्कूल भाठागांव, पं. सुंदरलाल शर्मा पूर्व माध्यमिक शाला, नूतन हायर मिडिल स्कूल टिकरापारा, सिंधी स्कूल रामसागर पारा, विप्र कला वाणिज्य एवं शारीरिक शिक्षा कॉलेज, दिशा एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, कांगेर वैली सोसायटी कॉलेज, प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि, महानदी एजुकेशन सोसायटी कॉलेज, डैफोडिल शैक्षणिक संस्थान, चाणक्य एकेडमी, कमल किशोर अग्रवाल महाराज अग्रसेन चैरिटेबल कॉलेज, वामन राव लाखे स्कूल, प्रेरणा एजुकेशन सोसायटी, सूर्या सामाजिक जन कल्याण समिति, आकांक्षा स्कूल, आर्यन इंटरनेशनल स्कूल, सेंट जेवियर स्कूल, बजाज शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्था, द. रेशियम एकेडमी होली क्रॉस सिस्टर्स एकेडमी शामिल है। नोट: इसमें कई ऐसे स्कूल भी शामिल हैं, ​जहां की फीस कम है। भास्कर एक्सपर्ट बीकेएस रे, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अधिनियम की होनी चाहिए समीक्षा
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 12 ए केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इस पर समाज में व्यापक बहस होनी चाहिए और केंद्र सरकार को भी इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई नामी स्कूल चैरिटेबल कार्य के नाम पर पूरी तरह व्यावसायिक संस्थान चला रहे हैं। ऐसे स्कूलों का गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से कोई सरोकार नहीं है। यहां मुख्य रूप से उद्योगपति और वरिष्ठ अधिकारियों के बच्चे पढ़ते हैं, जिनके लिए यह फीस कोई समस्या नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे संस्थानों को चैरिटेबल होने का लाभ क्यों दिया जाना चाहिए।

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