राजस्थान हाई कोर्ट में हर महीने के दो शनिवार को वर्किंग रखने के फैसले पर बार और बेंच आमने-सामने हो गई है। राजस्थान हाई कोर्ट की फुल बेंच ने फैसला लिया था कि साल 2026 से प्रत्येक माह के दो शनिवार को हाईकोर्ट में जज सुनवाई करेंगे। फैसले का विरोध वकीलों ने पहले दिन से ही शुरू कर दिया था। आज शीतकालीन अवकाश के बाद हाई कोर्ट में साल 2026 का पहला वर्किंग डे था। लेकिन वकील शनिवार को वर्किंग शुरू करने के विरोध में स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार पर चले गए। जिससे आज अदालत में सुनवाई बाधित रही। हालांकि जजेज कोर्ट में रूम में बैठे, जिन मामलों में पक्षकारों ने स्वयं उपस्थित होकर बहस करनी चाही, उनकी सुनवाई हुई। लेकिन अधिकतर मामलों में केवल अगली तारीख ही दी गई। न्यायिक कार्य मशीनरी वर्क नही है
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा कि न्यायिक कार्य कोई मशीनरी वर्क नहीं है। यह पूरी तरह से मेंटल वर्क होता है। पांच दिन में वकील और जज पूरी तरह से एग्जॉस्ट हो जाते हैं। उनको शनिवार को रेस्ट चाहिए। संडे वकीलो के लिए छुट्टी नहीं हैं। क्योंकि संडे को वकील सोमवार को होने वाली सुनवाई की तैयारी करता है, उसका पूरा दिन ऑफिस में निकलता हैं। उन्होने कहा कि वकील, जज और कोर्ट के हित में शनिवार नॉन वर्किंग डे ही रहना चाहिए।


