छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में चैत्नय बघेल को मिली जमानत को चुनैती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकारी की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ इस मामले में एक सप्ताह बाद सुनवाई करने की बात कही है। सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले का एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में जांच प्रभावित हो सकती है, जेठमालानी ने चैत्नय के जमानत आदेश पर पुनर्विचार करने की बात रखी। बैंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई एक हफ़्ते बाद करेगी। सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट जाने का निर्देश सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रही सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने उन्हें राहत देने के बजाय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश दिया। चौरसिया को कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि एजेंसियां नई-नई FIR दर्ज कर बार-बार गिरफ्तारी कर रही हैं और अब तक उन्हें छह बार हिरासत में लिया जा चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करें, साथ ही हाईकोर्ट को उनकी याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई करने कहा है। जांच एजेंसियों के दावे ED के अनुसार, 2019 से 2022 के बीच हुए कथित शराब घोटाले से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और एक शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचा। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के प्रमुख थे और करीब 1000 करोड़ रुपए की राशि संभाली। वहीं ACB/EOW का कहना है कि घोटाले की कुल रकम 3500 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है और इसमें कई लोगों ने मिलकर अपराध से कमाई गई राशि का प्रबंधन किया।


