राज्य में हुए शराब घोटाले की दो साल की जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को 29 हजार 800 पन्नों का फाइनल कंप्लेंट (परिवाद) पेश किया है। इसमें 22 गिरफ्तार अधिकारी, कारोबारी और नेताओं समेत कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन पर 2800 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। ईडी का दावा है कि यह एक संगठित अपराध है। ईडी के अनुसार आबकारी विभाग में घोटाले के लिए कारोबारी अनवर ढेबर, आईटीएस अरुणपति त्रिपाठी, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया ने एक सिंडिकेट बनाया। इस सिंडिकेट ने 15 जिलों को शराब घोटाले के लिए चिह्नित किया और अपने अनुसार अधिकारियों की पोस्टिंग कराई। सिंडिकेट की पहली पोस्टिंग आईएएस निरंजन दास की हुई, जिन्हें आयुक्त बनाया गया। सबसे पहले आबकारी नीति में बदलाव किया गया, इसके बाद घोटाले की शुरुआत हुई। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू को भी शामिल किया गया। पैसों के बंटवारे की जिम्मेदारी अनवर ढेबर, लक्ष्मीनारायण बंसल, केके श्रीवास्तव और विकास अग्रवाल पर थी। ईडी का दावा है कि इस घोटाले में 2800 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है, जबकि ईओडब्ल्यू इसे 3000 करोड़ रुपए का घोटाला बता रही है। एजेंसियों का अनुमान है कि घोटाले की राशि 3500 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। आरोपियों का दुबई, नीदरलैंड और लंदन में निवेश ईडी के अनुसार आरोपियों ने हवाला के माध्यम से घोटाले का पैसा विदेश भेजा। उस पैसे को दुबई, नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। अधिकांश निवेश रिश्तेदारों के नाम पर किया गया। बिना गिरफ्तार किए इन्हें बनाया आरोपी रिटायर आईएएस के बेटे यश टुटेजा, कारोबारी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू, दीपक दौरी, अनुराग द्विवेदी, प्रकाश शर्मा, सोहनलाल वर्मा, पीयूष बिजलानी, संजय दीवान, अमित सिंह, शराब कारोबारी नवीन केडिया, भूपेंद्र पाल सिंह भाटिया, राजेंद्र जायसवाल, आशीष सौरभ केडिया, सिद्धार्थ सिंघानिया, शराब अधिकारी जनार्दन कौरव, अनिमेष नेताम, विजय सिंह शर्मा, अरविंद कुमार पटले, प्रमोद नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास गोस्वामी, इकबाल अहमद खान, नितिन खंडुजा, नवीन प्रताप सिंह तोमर, मंजूश्री कसेर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, मोहित जायसवाल, नीतू नोतानी, गरीबपाल सिंह, नोहर सिंह ठाकुर, सोनल नेताम, प्रकाश पाल, आलेख राम सिदार, आशीष कोसम, अनंत सिंह, राजेश जायसवाल, जीतूराम मंडावी, गंभीर सिंह नरुटी, देवलाल वैद्य, अश्विनी अनंत, वेदराम लहरे, लखनलाल ध्रुव, आशीष श्रीवास्तव, विकास अग्रवाल, बच्चा राज लोहिया, अतुल सिंह, मुकेश मनचंदा, मनीष मिश्रा, अभिषेक सिंह, कृष्ण श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया। इन कंपनियों को भी बनाया गया आरोपी: छत्तीसगढ़ डिस्टलरी, भाटिया वाइन मर्चेंट, वेलकम डिस्टलरी, अदीप एग्रोटेक प्रा.लि., पीटरसन बायो रिफाइनरी, ढिल्लन सिटी मॉल, टॉप सिक्योरिटी एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट, ओम साईं बेवरेज, दिशिता वेंचर्स प्रा.लि., नेक्सजेन इंजिटेक, एजेएस एग्रोट्रेड प्रा.लि., ढेबर बिल्डकॉन, प्राइम डेवलपर्स, इंडियन बिल्डकॉन और प्रिज्म होलोग्राफी को भी आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट पेश होने के बाद अब ट्रायल होगा शुरू: ईडी की यह फाइनल कंप्लेंट (अंतिम चार्जशीट) सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समय पर दाखिल की गई है और इसमें डिजिटल सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और गवाहों के बयान शामिल हैं। इसके पेश होने के बाद अब कोर्ट ट्रायल शुरू करेगा। आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएंगे और उसके बाद गवाहों के बयान और सबूतों को लेकर सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जशीट की लंबाई और आरोपियों की संख्या के कारण यह केस लंबा और जटिल हो सकता है।


