शहर के लोग डॉगी के पीछे महीने में 30 हजार तक कर रहे हैं खर्च, पार्लर में एक बार ग्रूमिंग के लगते हैं 2.5 हजार

एजी कॉलोनी में के9 ग्रूमिंग सेंटर में पूडल की ग्रूमिंग हो रही है। हर महीने पूडल के बालों की शेपिंग की जाती है, हेयर कट होता है। डेंटल क्लीनिंग होती है, नेल कटिंग के साथ कैमरा से देखकर इयर क्लीनिंग की जाती है। इसके साथ ही वॉश कर कंडीशनर लगाया जाता है। इस प्रोसेस में घंटे भर लगता है और रेट ढाई हजार हैं। ओनर कुणाल गौरव ने बताया​ कि डॉग के हेयर व साइज के अनुसार रेट लगता है, जो 1500 से 2500 रुपए है। फ्रेंडली डॉगी का 40 मिनट से एक घंटे में ग्रूमिंग हो जाता है, वहीं कई बार दो-ढाई घंटे भी लगते हैं। 700-800 कस्टमर ऐसे हैं जो हर महीने ग्रूमिंग कराते हैं, वहीं कई लोग छह महीने में एक बार आते हैं। गर्मियों में 15-20 दिन में भी साफ-सफाई के लिए लोग अपने पेट को लेकर आते हैं। शहर में ऐसे कई सेंटर हैं, जहां लोग अपने पेट की साफ-सफाई और लुक में बदलाव के लिए लेकर जाते हैं। इसके साथ ही दर्जनों दुकानें हैं, जहां उनके लिए खाने-पीने के साथ सजाने-संवारने के लिए महंगी चीजें मिलती हैं। 500 रुपए का शैंपू, 100 का साबुन, 400 की क्रीम व 600 के लोशन लगाते हैं डॉगी तैराकी के साथ डेली जॉगिंग करता है बूटी मोड़ निवासी रिटार्यड सूबेदार मेजर प्रभास कुमार की बेटी स्वीटी कौशिक ने बताया कि डॉगी ब्रूनो फैमिली मेंबर की तरह है। लेब्राडोर नस्ल का डॉगी को घर में आए सालभर हुआ है। इसके खाने-पीने व अन्य चीजों पर महीने के 5000 रुपए खर्च आता है। इसे पेडिग्री, चिकन, डॉग बिस्किट, गाजर, दही-चूड़ा, केला, मटन खिलाते हैं। फिट रखने के लिये सुबह-सुबह जॉगिंग कराते हैं। पूल में तैराकी की भी ट्रेनिंग दी जाती है। मेंटल हेल्थ के लिये पजल गेम की ट्रेनिंग होती है। बाथरूम जाना होता है, तो बाथरूम के दरवाजे के पास आ कर खड़ा हो जाता है। 110 केजी के सेंट बर्नार्ड डॉगी पर माह में 30 हजार खर्च : 5 फीट लंबा व 110 केजी का ब्रूनो सेंट बर्नार्ड नस्ल का है। यह 24 घंटे एसी में रहता है। रोज 2 केजी मीट, 45 रोटी व चावल खाता है। बारिश की बूंदें ज्यादा पसंद है। थड़पखना निवासी प्रमित राज ने पंजाब से इसे 35 हजार रुपए में खरीदा था। इसके ऊपर महीने में 30 हजार रुपए खर्च होते हैं। हाल ही में हुए डॉग शो में इसने सेकेंड प्राइज मिला था। जिमी को 6 साल से फैमिली मेंबर की तरह पाल रहे थड़पखना निवासी अरुण कुमार व सुषमा कुमारी ने पुत्र तक्ष के कहने पर घर में जर्मन शेफर्ड 6 साल पहले लाए थे। उस समय इसका रेट 10 हजार रुपए था। आज बेटा तक्ष एक डाक्टर बन गया और जिमी बड़ी हो गई। अरुण ने बताया कि जिमी को खाने में दही रोटी, चिकन, पनीर, स्नैक्स, बिस्किट देते हैं। सप्ताह में एक दिन डॉगी के शैंपू से नहलाते हैं। जाड़े में गर्म पानी से नहलाते हैं। सुबह में एक्सरसाइज भी करता है। माइंड शार्प बनाने के ​लिए पजल गेम 200 में उपलब्ध पेट शॉप के संचालक मूलचंद ने बताया कि डॉगी के ग्रोथ के लिए हर महीने लोग हजारों खर्च कर रहे हैं। 100 से 1000 तक की दवा यहां मिलती है। रेडिमेड स्नैक्स लोग खूब ले जाते हैं। साबुन, शैंपू, क्रीम, लोशन की भी खूब खपत है।

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