देश की शीर्ष अदालत ने आवारा कुत्तों के काटने के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि हर डॉग बाइट, मौत पर भारी जुर्माना लगाएंगे। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने भी रांची सहित राज्य के सभी शहरों में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का आदेश दिया है। कोर्ट ने रांची नगर निगम को साफ कहा है कि किसी भी हाल में अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, एयरपोर्ट, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित बाजारों में आवारा कुत्ते न दिखें। पर निगम कुत्तों को नियंत्रित करने की कागजी योजना बनाने में ही जुटा है। जबकि, दूसरी ओर शहर में रोजाना औसतन 90 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं। रांची सदर अस्पताल के एंटी रेबीज डिपोर्टमेंट के आंकड़े को मानें तो रोजाना 200 से अधिक लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। इसमें 80 से 100 नए मामले शामिल हैं। भास्कर की टीम ने दो दिनों तक शहर के विभिन्न स्थानों की पड़ताल की तो कोर्ट के आदेश का कोई असर नहीं दिखा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है ऐसे समझिए क्यों बढ़ रहे डॉग बाइट लाख आवारा कुत्ते थे 2010 तक कुत्तों को रखने के लिए जगह नहीं नगर निगम द्वारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन का काम होप फॉर एनिमल संस्था को दिया गया है। लेकिन एक कुत्ते के बदले मात्र 380 रुपए दिए जाते हैं। संसाधन भी पर्याप्त नहीं हैं। चुटिया में एक डॉग अस्पताल बनाया गया है, जहां कुत्तों की नसबंदी और बीमार कुत्तों का इलाज किया जाता है। लेकिन वहां अधिक कुत्तों को नहीं रखा जा सकता। इसलिए नसबंदी के बाद कुत्तों को छोड़ दिया जाता है। कुत्ता काटने से बने घाव साबुन से धोएं कुत्ते के काटने पर बने घाव को कपड़े धोने वाले साबुन और चलते नल के पानी से साफ करें। घाव पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं। 24 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन लें। देसी दवा के चक्कर में न पड़ें। शरीर के ऊपरी हिस्से में काटना गंभीर डॉक्टर ने बताया कि किसी व्यक्ति के ऊपरी हिस्से जैसे गर्दन, चेहरे या मुंह के करीब कुत्ता काटता है तो रेबीज का खतरा अधिक होता है। ऐसे में रेबीज के इंजेक्शन के सभी चार डोज लेना चाहिए। झुंड में रहकर आक्रमक हो रहे, हल्की शरारत पर कर दे रहे हमला ठंड से बचने के लिए कुत्ते अकेले रहने के बजाय झुंड बनाकर रहना पसंद करते हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे के शरीर की गर्मी मिलती है। झुंड में होने पर वे अधिक ताकतवर समझते हैं। ऐसे में उनके सामने हल्की शरारत होने पर भी वे हमला कर देते हैं। कई बार रात में दो पहिया वाहन सवारों पर भी वे हमला करते हैं। ठंड में कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं, इसलिए काटते हैं पशु चिकित्सक डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि ठंड में भोजन की उपलब्धता कम हो जाती है। कुत्तों में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाता है। भूख और ठंड की वजह से कुत्ते चिड़चिड़े हो जाते हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति उसके आसपास आता है तो वे उसे खतरे के रूप में देखते हैं और हमला कर देते हैं। निगम प्रशासक बोले… आश्रय गृह बनाकर कुत्तों को रखने की होगी व्यवस्था 30 हजार से अधिक कुत्तों का रजिस्ट्रेशन नहीं। निगम के प्रशासक ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आवरा कुत्तों को रखने के लिए आश्रय गृह बनाने का निर्देश दिया है। इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही है। वहां नसबंदी और टीकाकरण की पूरी व्यवस्था होगी। इसके अलावा शहर के विभिन्न जोन में कुत्तों के लिए फीडिंग जोन भी बनाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का आदेश नहीं मानता रांची नगर निगम, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज से लेकर सड़कों पर आवारा कुत्तों का जमघट


