भास्कर न्यूज| बड़कागांव बड़कागांव प्रखंड संसाधन केंद्र अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोसाई बलिया में झारखंड सरकार ” उन्नति का पहिया ” कार्यक्रम के तहत आठवीं क्लास के बच्चों के बीच साइकिल वितरण किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि चंदनपुरी के हाथों कुल 32 विद्यार्थियों के बीच साइकिल वितरण किया गया। इस दौरान पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के बीच स्कूल बैग का भी वितरण किया गया। मौके पर चंदनपुरी ने बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सरकार की यह अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना से बच्चों को आगे की शिक्षा पूर्ण करने में काफी सहायता प्रदान हो रहा है। मौके पर मुखिया प्रतिनिधि चंदनपुरी, बीआरपी धनंजय कुमार दास, एसएमसी अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार वर्मा, वार्ड सदस्य सुरेश रजक, प्रधानाध्यापक गोपाल कुमार दांगी, वरिष्ठ शिक्षक समीम उल्लाह, सहायक अध्यापक मोतीलाल गिरी, मो. मजाज अल्वी, जितेंद्र प्रसाद दांगी, प्रमेश गिरी, रेणु कुमारी, अरुणा कुमारी, एमसी के सदस्य रसोईया व अन्य उपस्थित थे। उमेश राणा| हजारीबाग कश्मीर के अखनूर सेंटर में 11 फरवरी को दिन में आईडी ब्लास्ट के दौरान शहीद हुए कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी उर्फ पुनीत की मां हरजीत कौर उर्फ नीलू बक्शी ने कहा कि देश के लिए शहीद हुए बेटे पर हमें गर्व है। पर व्यवस्था ऐसी रही तो कोई भी मां अपने बेटे को आर्मी में कैसे भेजेगी। तीन माह से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रही हूं, क्या कोई शहीद की मां इस तरह से कार्यालयों का चक्कर लगाएगी। भास्कर से बातचीत के दौरान शहीद कैप्टन की मां फफक पड़ीं और कहा कि दुख इस बात की है कि शहादत के वक्त सभी आते हैं और साथ खड़े रहने की बात कहते हैं लेकिन कांधा कोई नहीं देता। बाद में सभी भूल जाते हैं। इनसे अच्छे तो आर्मी वाले हैं जो हर दो-चार दिन में फोन करके हाल-चाल पूछते रहते हैं। एक शहीद की मां को उसके हक के लिए अगर अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगाना पड़े तो यह बहुत दुखद है। उन्होंने कहा कि तीन माह होने चले अभी तक पेंशन का प्रोसेस भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार की ओर से मिलने वाली 10 डिसमिल जमीन का चयन भी कराया गया लेकिन अब तक जमीन से संबंधित किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई पूरी नहीं की जा सकी है। एक मां को यह जानने का तो हक है ही कि आखिर प्रक्रिया कहां तक बढी। उन्होंने कहा कि जब तक हजारीबाग जिले से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी तब तक पेंशन की फाइल नहीं खुलेगी। मैं एक बार बोलती हूं तो 100 बार मरती हूं। किसे कहें कि 3 माह से कैसे रह रही हूं। कोई देखने नहीं आता। उस वक्त साथ खड़े होने की बात तो सभी ने कहा था। शहीद के माता-पिता। जिले के वरीय से लेकर अंचल तक के पदाधिकारी के पास जाती हूं तो सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। जबकि मेरे बेटे के साथ ही शहीद हुए आर्मी ऑफिसर को मिलने वाले हक की सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है। कहा कि मेरे घर के आंगन में शहीद कैप्टन करमजीत सिंह बक्शी मार्ग की बोर्ड काफी दिनों से पड़ी हुई है। सुबह शाम देखती हूं और गला भर आता है। करमजीत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा थे। उनकी मां ने बताया कि जब वह 5 माह का था पैर टिकाना शुरू किया था तभी से उसमें जुनूनी झलक दिखने लगी थी। बड़ा हुआ तो आर्मी में जाने की इच्छा जताई। इकलौता बेटा होते हुए भी हमने उसे नहीं रोका। फर्स्ट अटेम्प्ट में फिजिकल में एक सेंटीमीटर हाथ में डिफॉल्ट होने के कारण छंट गया। फिर से उसने यूपीएससी की तैयारी शुरू की लेकिन आर्मी में जाने का जुनून उस पर सवार था। दूसरी कोशिश में उसने सफलता पाई और आर्मी का कप्तान बन गया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच अप्रैल को उसकी शादी तय थी। अगर शादी के बाद यह घटना घटी होती तो एक और जिंदगी तबाह हो जाती। कहा कि मैं एक शहीद कैप्टन की मां हूं। मैं उन सभी माताओं के साथ मिलकर उन बेटों के लिए दुआ करुंगी जिनके बेटे हमारे देश की रक्षा में जुटे हैं।


