जिले के मक्सी और शाजापुर शहर में नवरात्रि की ग्यारस पर दुर्गा प्रतिमाओं का पारंपरिक विसर्जन चल समारोह निकाला गया। मक्सी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 25 स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं में से कई झांकियां इस विसर्जन चल समारोह में शामिल हुईं। नौ दिनों की अथाह भक्ति के बाद अपनी लाड़ली माता को विदाई देते समय नगरवासी और भक्तजन भावुक हो उठे। मक्सी में विसर्जन के दौरान “आंगन डगर घर सूना, अधीर भये नैन” जैसे मार्मिक भजनों ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। जब एकता युवा मंच पर विराजित मां काली की प्रतिमा को मंच से उठाया गया, तो बैंड की धुन पर बज रहे विदाई भजनों से कई महिलाएं, पुरुष और बच्चे प्रतिमा के पीछे-पीछे चले। कई झांकियां इस दौरान निकाली गई चल समारोह निर्धारित समय से दो घंटे देरी से दोपहर 1 बजे बस स्टैंड एबी रोड से शुरू हुआ, जहां सभी दुर्गा पंडालों की प्रतिमाएं एकत्रित हुईं। समारोह में नया बाजार झंडा चौक समिति की प्रस्तुत राधा-कृष्ण, हनुमान और वानर सेना के कलाकारों की झांकियां मुख्य आकर्षण रहीं। इसके अलावा मां कालका का रूप धारण किए कलाकारों और भगोरिया नृत्य समूह ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भंडारे में लोगों ने ग्रहण की प्रसादी इस अवसर पर एकता युवा मंच ने मां कालका के दरबार में भंडारा आयोजित किया, जिसमें लगभग 6 क्विंटल आटे की पूडियां बांटी गईं। चल समारोह में नगर के विभिन्न दुर्गा पंडाल समितियों ने उज्जैन और आसपास के जिलों से बुलाए गए प्रसिद्ध बैंडों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। प्रशासन ने कनसिया रोड स्थित गिट्टी खदान पर मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था की है। ग्यारस के दिन सुबह से शाम तक दर्जनों दुर्गा प्रतिमाओं का क्रेन के माध्यम से सुरक्षित विसर्जन किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से मक्सी थाने के बल के अलावा एसडीआरएफ की टीम पूरे समय मुस्तैद रही।


