रांची | झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में दुमका जिले के हाईस्कूलों में शारीरिक शिक्षक पद पर नियुक्त शिक्षकों को हटाने के मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने प्रार्थी और प्रतिवादी का पक्ष सुनने के बाद मामले में यूजीसी को प्रतिवादी बनाते हुए शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि भारत में कितने प्रकार की स्ट्रीम में पढ़ाई होती है और तीन साल का बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) किस स्ट्रीम में आता है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या इस डिग्री को यूजीसी से मान्यता प्राप्त है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई अब छह सप्ताह बाद होगी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि प्रार्थी ने तीन साल का बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन कोर्स पूरा किया है और बीपीएड की डिग्री भी हासिल की है। यह डिग्री साइंस स्ट्रीम में आती है। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षक पद पर नियुक्ति के 11 माह बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को अनुशंसा वापस लेने का अधिकार नहीं है। इस मामले में अन्ना मेरी सोरेन समेत अन्य ने अदालत में याचिका दायर की है।


