भास्कर न्यूज | अमृतसर छेहर्टा पुरानी चुंगी स्थित प्रीत विहार इलाके के मणि महेशा शिवाला मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। वृंदावन धाम से पधारे बालयोगी महाराज ब्यास गद्दी पर विराजमान हुए। महाराज ने सबसे पहले ठाकुर जी के समक्ष पवित्र ज्योति जलाई। इसके बाद कथा करते महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाती है। संसार में कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं जिसकी मृत्यु का समय निश्चित न हो। स्वामी महाराज ने कहा कि सुखदेव जी ने राजा परीक्षित पर अपनी करुणा करते उन्हें मृत्यु के भय से मुक्त किया। स्वामी महाराज ने कहा कि जीव ईश्वर का अंश है। आनंद और सुख की राशि है, जो अपने स्वरूप को पहचान जाता है वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। जबकि भागवत किसी ने बनाया नहीं। भगवान ने अपनी शक्ति से ब्रह्माजी के हृदय में इसे प्रकट किया। ब्रह्मा जी ने यह कथा पहले अपने मानस पुत्र सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार फिर बाद में नारद जी को सुनाई। नारद जी ने भगवान वेद व्यास को और फिर व्यास पुत्र ऋषि शुकदेव ने 7 दिनों तक राजा परीक्षित तथा ऋषि-मुनियों को श्रीमद्भागवत कथा सुनाई थी। कहा जाता है कि तभी से भागवत सप्ताह सुनने की परंपरा प्रारंभ हुई थी। इस मौके पर महाराज की तरफ से ठाकुर जी के कई भजन गाए गए। भजन सुनकर भक्तजन नाचने लगे। अंत में हवन यज्ञ करके महाराज ने कथा का समापन किया।


