बिलासपुर | श्रीराम पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में हुई। इसमें छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रख्यात लेखक एवं समीक्षक डॉ. संजय अनंत ने एक महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने अपने शोध आलेख विश्व के विभिन्न देशों से आमंत्रित विद्वानों के समक्ष प्रस्तुत किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से सामाजिक समरसता का आदर्श स्थापित किया। उन्होंने केवट, वनवासियों और शबरी जैसे समाज के वंचित माने जाने वाले वर्गों के साथ समान व्यवहार कर यह संदेश दिया कि मानवता ही सर्वोपरि है। शबरी के प्रेम से अर्पित बेर स्वीकार कर उन्होंने सामाजिक भेदभाव को नकारा। डॉ. अनंत ने कहा कि रामराज्य में केवल अभिजात्य वर्ग ही नहीं, बल्कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी समान रूप से सुनवाई होती थी। संगोष्ठी में सूरीनाम, कुवैत, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दुबई सहित कई देशों के विद्वान शामिल हुए।


