मेवाड़ के कृष्णधाम सांवलियाजी में सोमवार शाम भक्ति और आस्था से भरा दृश्य देखने को मिला। यहां भगवान सांवलिया सेठ के एक श्रद्धालु ने सोने की 100 ग्राम की चैन और बड़ी मात्रा में नकद राशि भंडार में चढ़ाई। इस घटना की जानकारी मिलने पर मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों के बीच चर्चा भी रही। सभी ने कहा कि भगवान के प्रति इतना प्रेम और आस्था अपने आप में बड़ी बात है। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस प्रकार की भेंटें मंदिर की परंपरा और धार्मिक भावना को और मजबूत बनाती हैं। भीलवाड़ा के सरेवड़ी गांव से जुड़ा है श्रद्धालु परिवार इस भेंट को करने वाले रोशनलाल जैन चावत मूल रूप से भीलवाड़ा जिले की रायपुर तहसील के सरेवड़ी गांव के निवासी हैं। उनका परिवार लंबे समय से सांवलिया सेठ के भक्त हैं। वर्तमान में वे ‘सांवलिया ग्रुप’ के नाम से बेंगलुरु और जोधपुर में व्यवसाय करते हैं और उनके ज्वेलरी शोरूम भी है। सभी ज्वेलरी का ही बिजनेस करते हैं। व्यवसायिक व्यस्तताओं के बावजूद वे हर अवसर पर भगवान के दर्शन करने आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी हर सफलता में सांवलिया सेठ का आशीर्वाद शामिल है। इसी भावना से वे परिवार सहित मंदिर पहुंचे और भेंट अर्पित की। 100 ग्राम सोने की चैन और बैग-भरकर नोटों की भेंट चावत परिवार ने भगवान को 100 ग्राम सोने से बनी खूबसूरत चैन अर्पित की, जिसे विशेष रूप से सांवलियाजी के स्वरूप के अनुरूप तैयार किया गया था। इसके साथ ही वे एक बैग में कई लिफाफों में भरी नकदी भी लेकर आए थे। भंडार में डाले गए नोटों की सटीक राशि बताना संभव नहीं था, लेकिन अनुमान है कि यह रकम लाखों रुपए में हो सकती है। परिवार ने स्पष्ट कहा कि “यह दान भगवान के लिए है, इसका कोई हिसाब रखने की जरूरत नहीं है।” इसी वजह से वे नोट लिफाफों में लाए थे। सबको इसकी जानकारी देने से भी उन्होंने इनकार कर दिया। इसमें अलावा उन्होंने मन्नत की भी जानकारी नहीं दी। परिवार के कई सदस्य रहे दर्शन के दौरान मौजूद रोशनलाल जैन अपनी धर्मपत्नी कमलाबाई, पुत्र अशोक और परिवार के अन्य सदस्यों रेखा, राहुल, कांता, विनोद, आदित्य, जीनू, शिवांश, मंजू, चेतना, श्रीमाल, हितेश और योगिता के साथ सांवलियाजी पहुंचे। इसके अलावा उनके दोस्त पवन कुमार शर्मा भी उनके साथ थे। सभी ने मंदिर में प्रवेश कर विधिवत दर्शन किए और भगवान के सामने अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरा परिवार शांत वातावरण में आरती और पूजन में शामिल हुआ। परिवार के सदस्यों का कहना था कि वे हर अच्छे कार्य की शुरुआत भगवान के दर्शन से ही करते हैं और यह भेंट उसी परंपरा का हिस्सा है। मंदिर मंडल ने किया परंपरा अनुसार स्वागत सांवलियाजी मंदिर मंडल के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव और मंदिर प्रशासन ने चावत परिवार का परंपरा अनुसार सम्मान किया। उन्हें प्रसाद और ऊपरना भेंटकर स्वागत किया गया। मंदिर की परंपरा है कि जो भी भक्त मनोकामना पूरी होने पर बड़ी भेंट करता है, उसका प्रशासन द्वारा सम्मान किया जाता है। इस अवसर पर मंदिर मंडल के पूर्व सदस्य ममतेश शर्मा और व्यवसायी सुनील मंडोवरा भी मौजूद रहे।


