श्री कृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ दिखाया भक्ति का मार्ग

भास्कर न्यूज । लुधियाना शिव शक्ति मंदिर, कोट मंगल सिंह में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गोवर्धन पूजा का महत्व बताया गया। श्री किशोरी कृपा धाम के श्रीनाथ जी महाराज ने कथा के दौरान कहा कि गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है और इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति और गोधन के प्रति श्रद्धा प्रकट करना है, क्योंकि गायों को शास्त्रों में पवित्र और देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। कथा के दौरान श्रीनाथ जी महाराज ने बताया कि एक बार इंद्र को अहंकार हो गया कि वे ही वर्षा के माध्यम से संसार का पालन कर रहे हैं। जब ब्रजवासी उनकी पूजा की तैयारी कर रहे थे, तो भगवान कृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि वही उनके गोधन को चारा और शरण देता था। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलधार बारिश शुरू कर दी, लेकिन भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर सात दिन तक गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी को सुरक्षित रखा। अंततः इंद्र ने अपनी गलती स्वीकार कर भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी। श्रीनाथ जी महाराज ने कहा कि गाय केवल दूध ही नहीं देती, बल्कि अपने बछड़े के माध्यम से कृषि और मानव कल्याण में योगदान करती है। गौसेवा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और इसी कारण कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस अवसर पर हरबंश लाल मल्होत्रा, प्रदीप दीपू, सजीव शर्मा, परविंदर कुमार, अनिल कुमार, अश्वनी सूद, पवन चोपड़ा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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