भास्कर न्यूज | अमृतसर मोक्षदा एकादशी रविवार रात 9:29 बजे से शुरू हो गई। इसका समापन सोमवार को शाम 7 बजे है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का व्रत इस बार उदयातिथि के कारण सोमवार को रखा जाएगा। यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। पंचांग के अनुसार सोमवार को व्रत के दिन सुबह 8:20 बजे से शाम 7 बजे तक भद्रा रहेगी। वहीं, सुबह 6:56 बजे से रात 11:18 बजे तक पंचक का योग भी रहेगा। इसके अगले दिन सुबह 6:57 से सुबह 9:03 बजे तक व्रत पारण किया जा सकेगा। श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के पंडित ओम प्रकाश शास्त्री के मुताबिक मोक्षदा एकादशी पर दुर्ग्याणा के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में सुबह साढ़े 6 बजे दुग्ध स्नान और साढ़े 8 बजे आरती होगी। शुक्ल पक्ष में मोक्षदा नाम की एकादशी होती है। इस दिन तुलसी की मंझरी और धूप दीप से भगवान दामोदर का पूजन करना चाहिए। पंडित ओम प्रकाश शास्त्री के अनुसार जिसके पितर पाप वश नीच योनि में पड़े हों वह इसका पुण्य दान करने से मोक्ष को प्राप्त होते हैं। उदाहरण के तौर पर पंडितों ने कहा कि चंपक नगर में वेखानस नामक राजा रहते थे। एक दिन राजा ने सपने में अपने पितरों को नीच योनि में पड़ा हुआ देखा। उनको इस अवस्था में देखकर राजा के मन में बड़ा विस्मय हुआ। सुबह काल ब्राह्मणों से उन्होंने सपने का सारा हाल कह सुनाया। राजा बोले मैंने अपने पितरों को नरक में गिरा देखा है। वह कहते हैं कि आप हमारे अनुज हो इसलिए इस नरक से हमारा उद्धार करो। यह बात सुनकर मुनि राजा से बोले मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में जो मोक्षदा नाम की एकादशी होती है। तुम सब लोग उसका व्रत करो और उसका पुण्य पितरों को दे डालो। उस पुण्य के प्रभाव से उनका नरक से उद्धार हो जाएगा। जब मार्गशीर्ष मास आया तभी राजा ने मुनि के कहे अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। जिससे उनके पितरों को नरक से छुटकारा मिल गया।


