श्री वाल्मीकि तीर्थ में नेता सिर्फ माथा टेकेंगे, अब सम्मान और स्पीच पर रोक

पावन श्री वाल्मीकि तीर्थ में रविवार को पंजाब भर से आए वाल्मीकि समाज के संत महापुरुष और नेताओं की बैठक हुई। जिसमें संत समाज के सर्वतः निर्देशक आधस शुक्राचार्य दर्शन रत्न रावण, श्री धुन्ना साहिब ट्रस्ट के महंत मलकीत नाथ, भावाधस के संत लंकेश कुमार, कुमार दर्शन, पवन गिल, शशि गिल, पवन द्रविड़, सतीश गिल समेत पंजाब भर से समाज के नेता शामिल हुए। इसमें संत समाज ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि तीर्थ में माथा टेकने आने वाले किसी भी पार्टी के नेता को सम्मानित नहीं किया जाएगा। जबकि नेता राजनीतिक स्पीच भी नहीं देंगे। इन नेताओं को श्राइन बोर्ड के कमरे में ले जाकर सम्मानित किया जाएगा। जबकि मंदिर में पाठ निरंतर चलता रहेगा। मीटिंग में स्पष्ट कहां की बेअदबी मामले में मंगलवार को समाज की ओर से भंडारी पुल पर दिए जाने वाले धरने में किसी भी पार्टी के नेता को नहीं बुलाया जाएगा। उन्होंने हल्का वेस्ट के विधायक डॉ. जसवीर सिंह संधू की ओर से वीडियो बनाकर माफी मांगने के बारे में कहा कि संत समाज की ओर से किसी को माफी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि माफी मांगने का तरीका गलत है। समाज के लोगों ने कहा कि माफी देने या न देने पर संत समाज विचार करेगा और उनका फैसला अंतिम होगा। मीटिंग में फैसला लिया की तीर्थ में होने वाले विकास कार्यों को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन दिया गया है। परंतु अभी तक विचार नहीं किया गया। इससे समाज के लोगों में गुस्से की लहर है और जल्द पंजाब भर में संघर्ष होगा। इसमें अगर कुछ होता है तो जिम्मेदारी सरकार की होगी। सरकार द्वारा बनाई श्राइन बोर्ड कमेटी में संत समाज को भी शामिल करना चाहिए। वहीं सरकार यह देखे कि श्राइन बोर्ड में शामिल किए राजनैतिक लोग वाल्मीकि मर्यादा रखते है या नहीं।

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