जिसने अपनी पूरी जिंदगी मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाने में लगा दी, वही बुजुर्ग डॉक्टर आज अपनी ही जिंदगी के अंधेरे में कैद कर दी गई। जिला अस्पताल से रिटायर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव (81) की कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की नहीं, बल्कि उस दर्दनाक सच की है, जहां करोड़ों की संपत्ति रिश्तों के लिए लालच बन जाती है। डॉ. हेमलता के पास 60 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई जा रही है। उनका बेटा भी डॉक्टर था, जिसकी 2022 में मौत हो गई। पति महेश कुमार श्रीवास्तव सरकारी डॉक्टर रहे और दिसंबर 2025 में उनका भी निधन हो गया। पति-बेटे के जाने के बाद बुजुर्ग डॉक्टर बिल्कुल अकेली रह गईं। पति और बेटे के निधन के बाद रिश्तों ने खेला खेल… जमीन हड़पने की भी तैयारी पति के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी हुई। इसके बाद उनकी छोटी बहन शांति तिवारी व जीजा राजेंद्र कृष्ण तिवारी उनके साथ रहने आए। आरोप है कि बहन-जीजा ने ही उन्हें बंधक जैसी हालत में जीने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्हें भूखा रखा गया। प्यास लगने पर बार-बार मांगने के बावजूद 50 से ज्यादा दिन तक नाम मात्र का खाना और तीन चम्मच पानी दिया जाता था। उन्हें अजीब तरह से कड़वी चाय पिलाई जाती थी। 22 सालों से उनकी सेवा कर रहे कर्मचारियों को किचन तक जाने से रोक दिया गया। इसी दौरान जमीन का खेल भी शुरू हो गया। 2 जनवरी 2026 को राइट टाउन इलाके में स्थित करीब 22 हजार वर्ग फीट जमीन की कथित रजिस्ट्री डॉ. अंशुल जैन और ऋचा जैन के नाम कर दी गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया। 26 दिसंबर को आईएमए की प्रेसिडेंट डॉ. ऋचा शर्मा को जब कहीं से डॉ. हेमलता को बंधक बनाने की सूचना मिली, उन्होंने कलेक्टर और एसपी को जानकारी दी। 27 जनवरी को प्रशासन और पुलिस ने मिलकर बुजुर्ग डॉक्टर को मुक्त कराया और मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। फिलहाल वे वेंटिलेटर पर हैं, लेकिन धीरे-धीरे हालत में सुधार हो रहा है। 15 जनवरी को डॉ. हेमलता ने मदन महल थाने में शिकायत दी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर बताया कि उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा। लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। नियम के मुताबिक- शिकायत पर अमल के लिए पीड़ित का बयान मजिस्ट्रेट के सामने होना अनिवार्य है, जो अभी नहीं हुआ। हालांकि मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि 22 जनवरी को अस्पताल ले जाते समय उन्हें बीच रास्ते रजिस्ट्री कार्यालय ले जाकर दान पत्र के जरिए आधी जमीन गायत्री परिवार के नाम कर दी गई। डॉ. हेमलता ने साफ कहा है कि उन्होंने न कोई रजिस्ट्री कराई और न ही जमीन दान में दी। कार्रवाई के लिए पीड़ित का बयान जरूरी
अभी बुजुर्ग डॉक्टर एडमिट हैं, और बात करने लायक स्थिति में नहीं है। जब तक पीड़ित के बयान नहीं लिए जाए। तब तक जांच आगे नहीं बढ़ सकती है।
-पंकज मिश्रा, एसडीएम जांच अधिकारी
पीड़ित वेंटिलेटर पर … इसलिए नहीं हुए बयान
इस मामले में जो शिकायत प्राप्त हुई है, उनमें पीड़ित के अलावा अब तक 4 से 5 शिकायत पक्ष और विपक्ष से मिली हैं। पीड़ित अभी बयान देने की हालत में नहीं है, इसलिए आगे की जांच के लिए रजिस्ट्री कार्यालय सहित अन्य को नोटिस जवाब देने दिया गया है।
धीरज राज, थाना प्रभारी मदन महल


